मंदारेश्वर महादेव मंदिर
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कभी जंगलों से घिरा था क्षेत्र
मंदारेश्वर महादेव मंदिर कई वर्षों पूर्व जंगलों से घिरा हुआ था, संध्या होने पर चंद श्रद्धालु ही यहां पर आकर अपने आराध्य का पूजन करते थे। धीरे-धीरे यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ने लगी। साथ ही आसपास खाली स्थान पर अन्य मंदिर भी निर्मित किए गए, जिससे अब यहां रौनक बनी रहती है। मंदिर ट्रस्ट की ओर से मुख्य प्रवेश द्वार के दोनों छोर पर भगवान शिव की सवारी के रूप में विशाल वृषभ (बैल) बनवाए गए हैं।
पहाड़ की सबसे ऊंची चोटी पर विशाल त्रिशूल भी उकेरा गया है, जो शहर से कई किलोमीटर दूर से ही दिखाई पड़ता है। मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख प्रेमकांत जोशी के अनुसार, विगत वर्षों में यहां पर एक बड़ा भवन भी बनाया गया है, ताकि श्रद्धालुओं के ठहरने की सुविधा हो सके। इसके अतिरिक्त ट्रस्ट की ओर से यहां पर जरूरतमंदों के लिए निशुल्क भोजन की भी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।