फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Banswara News: घर में सो रहे दो किशोरों को उठाकर लाए और करा दी शादी, बांसवाड़ा में होली की अनूठी परंपरा

Mon, 02 Mar 2026 04:32 PM IST
बांसवाड़ा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा

सार

स्थानीय मान्यता और परंपरा के तहत होली की पूर्व रात्रि पर बांसवाड़ा के एक गांव में उत्सव के बीच दो किशोरों को दूल्हा-दुल्हन बनाकर उनकी प्रतीकात्मक शादी कराई गई।
विज्ञापन
1 of 4
बांसवाड़ा में 500 साल पुरानी अनूठी परंपरा - फोटो : अमर उजाला
दक्षिणी राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में होली की पूर्व रात्रि पर एक अनूठी परंपरा का निर्वहन किया गया। ग्रामीण अपने-अपने घरों में सो रहे दो किशोरों को उठाकर मंदिर लेकर आए और उल्लासपूर्ण वातावरण में विधि-विधान के साथ उनकी प्रतीकात्मक शादी कराई।



बड़ोदिया कस्बे के लक्ष्मी नारायण मंदिर में वर्षों पुरानी इस परंपरा को गांव के मुखिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी में निभाया गया। सबसे पहले दो अलग-अलग टोलियां बनाकर किशोरों को खोजने के लिए भेजा गया। जैसे ही दोनों बच्चों का चयन हुआ, टोलियों ने आपस में संपर्क किया और उन्हें लेकर मंदिर पहुंचे।
विज्ञापन

2 of 4
बांसवाड़ा में 500 साल पुरानी अनूठी परंपरा - फोटो : अमर उजाला
दूल्हा बनने की जिद
मंदिर पहुंचने के बाद विवाह की रस्म शुरू करने की तैयारी की गई लेकिन दोनों किशोर दूल्हा बनने की जिद पर अड़ गए। इस पर मुखिया नाथजी पटेल, डॉ. स्वामी विवेकानंद महाराज, रणछोड़ पटेल और अन्य ग्रामीणों ने आपसी सहमति से एक को दूल्हा और दूसरे को दुल्हन बनाने का निर्णय लिया।
विज्ञापन

3 of 4
बांसवाड़ा में 500 साल पुरानी अनूठी परंपरा - फोटो : अमर उजाला
महिलाओं ने दोनों को हल्दी लगाई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंडप में प्रतीकात्मक विवाह संपन्न कराया गया। वरमाला पहनाई गई, फेरे दिलाए गए, मंगलसूत्र पहनाया गया और दुल्हन की मांग में सिंदूर भरा गया। इस दौरान ग्रामीण लोकगीत गूंजते रहे और माहौल उत्साह से भर उठा। विवाह से पूर्व मामेरा की रस्म भी निभाई गई, जिसमें दोनों बच्चों को पेन और पुस्तकें भेंट कर शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आशीर्वाद दिया गया।

ये भी पढ़ें: Rajasthan: जयपुर में 13वां विशाल फागोत्सव ‘ढूंढाड़ की धमाल’ हुआ रंगारंग, दिया कुमारी ने दी होली की बधाई
विज्ञापन

4 of 4
बांसवाड़ा में 500 साल पुरानी अनूठी परंपरा - फोटो : अमर उजाला
श्राप से मुक्ति की मान्यता
मुखिया नाथजी पटेल और डॉ. स्वामी विवेकानंद महाराज ने बताया कि यह परंपरा एक प्राचीन मान्यता से जुड़ी है। लगभग 500 वर्ष पूर्व खेर जाति के लोगों ने बड़ोदिया गांव छोड़ते समय कथित रूप से श्राप दिया था कि यदि होली से एक दिन पूर्व दो लड़कों का विवाह नहीं कराया गया तो गांव उजड़ जाएगा।

बताया जाता है कि करीब 90 वर्ष पहले एक बार यह परंपरा नहीं निभाई गई थी, जिसके बाद गांव में बड़ी संख्या में पशुधन की हानि हुई। तब से यह परंपरा निरंतर निभाई जा रही है और इसमें पूरे गांव की सक्रिय सहभागिता रहती है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें