स्तंभों पर दिखी इस तरह की डिजाइन।
- फोटो : सोशल मीडिया
जानिए...क्या है अढाई दिन के झोपड़े का इतिहास?
1198 में मोहम्मद गोरी के आदेश पर कुतुबुद्दीन ऐबक ने एक हिंदू इमारत को तोड़कर अढ़ाई दिन का झोपड़ा बनवाया था। यहां इससे पहले एक संस्कृत महाविद्यालय और मंदिर थे। जिन्हें तोड़कर मस्जिद में बदल दिया गया था। झोपड़े के मुख्य द्वार पर संगमरमर का बना एक शिलालेख भी है, जिस पर संस्कृत में उस विद्यालय का जिक्र किया गया है। यहां मंदिरों के 70 स्तंभ आज भी मौजूद है। हैं। हर स्तंभ पर खूबसूरत नक्काशी की गई है और उनकी ऊंचाई करीब 25 फीट है। बताया जाता है कि 90 के दशक में यहां कई प्राचीन मूर्तियां बिखरी पड़ी थीं, जिन्हें बाद में संरक्षित किया गया। झोपड़े में बनी नई दीवारों पर कुरान की आयतें लिखी गईं हैं, जिससे पता चलता है कि अब यह मस्जिद है। कहा जाता है कि, महाविद्यालय को मस्जिद बनने में ढ़ाई दिन लगे थे, इसी से इसका नाम अढ़ाई दिन का झोपड़ा पड़ गया।