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Shardiya Navratri 2025: सम्राट पृथ्वीराज चौहान की कुलदेवी हैं माता चामुंडा, नवरात्रि में उमड़ा आस्था का सैलाब

Wed, 24 Sep 2025 07:00 AM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर

सार

1160 साल से ज्यादा पुराने अजमेर के चामुंडा माता मंदिर हजारों लोगों की आस्था का केंद्र है। कहा जाता हे कि माता ने सम्राट पृथ्वीराज चौहान को यहां दर्शन दिए थे।
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चामुंडा माता मंदिर, अजमेर - फोटो : अमर उजाला
अजमेर के वरुण रोड स्थित बोराज गांव की पहाड़ी पर विराजमान चामुंडा माता के मंदिर में साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। यह लाखों लोगों का आस्था का केंद्र है। बता दें कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने इस मंदिर की स्थापना की थी और वे स्वयं यहां पूजा-अर्चना किया करते थे। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर चामुंडा माता ने पृथ्वीराज चौहान को इस स्थान पर दर्शन भी दिए थे ।
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सम्राट पृथ्वीराज चौहान की कुलदेवी हैं - फोटो : अमर उजाला
1160 वर्ष पूर्व हुई थी स्थापना
मंदिर के पुजारी मदन सिंह रावत ने  बताया कि मंदिर की स्थापना 1160 से अधिक वर्ष पूर्व हुई थी, तब से लेकर आज तक चामुंडा माता की पूजा-अर्चना नित्य होती है। मंदिर प्रांगण में गंगा मैया, भगवान भोलेनाथ, हनुमान जी और भैरव बाबा का भी मन्दिर है। गंगा मैया के मंदिर में जल का एक छोटा सा कुंड है, जिसका पानी कभी भी समाप्त नहीं होता । इस कुंड के जल को गंगा के समान पवित्र माना जाता है। 
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नवरात्रि में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
पृथ्वीराज चौहान की कुलदेवी
बताया जाता है कि चामुंडा माता सम्राट पृथ्वीराज चौहान की कुलदेवी हैं। स्थानीय लोग चामुंडा माता को चामुंडा माई कह कर पुकारते हैं। कहा जाता है कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान माता के अनन्य भक्त थे। यहीं वह स्थान है जहां माता ने उन्हें दर्शन दिये थे। बोराज गांव से मंदिर के सेवादार यहां पूजा-अर्चना करते हैं। 

युद्ध में जाने से पहले सम्राट पृथ्वीराज चौहान माता का आशीर्वाद लेने इसी चामुंडा माता मंदिर में जाते थे । यह ऐतिहासिक मंदिर अजमेर के एक झील वरुण सागर के पास में पहाड़ी के ऊपर स्थित है। 

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साल भर लगता है भक्तों का मेला - फोटो : अमर उजाला
कुंड का पानी नहीं होता खत्म
मंदिर में माता गंगा का एक ऐसा कुंड है, जिसमें पानी कभी समाप्त नहीं होता। मंदिर के बारे में कहा जाता है यहां पर सिर्फ माता का मुख ही बाहर की तरफ है, बाकी शरीर धरती के अंदर है। नवरात्रि के दिनों में यहां बहुत ही धूमधाम से आरती की जाती है और विशेष तौर से मेला लगता है।
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हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है चामुंडा माता मंदिर - फोटो : अमर उजाला
हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र
जिले का सबसे प्राचीनतम मंदिर होने के चलते वहीं नवरात्रों के नौ दिनों में हजारों की संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्रों में मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है और माता का विशेष शृंगार किया जाता है।
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