शहीद-ए-आजम भगत सिंह और उनके साथियों की गतिविधियों की यादों के कारण पंजाब के फिरोजपुर के तूड़ी बाजार में बना गुप्त ठिकाना पर्यटकों को अपनी तरफ खींच रहा है। यहीं वह जगह है जहां पर क्रांतिकारी देश से अंग्रेजों को खदेड़ने की रणनीति बनाते थे। अंग्रेज अधिकारी साण्डर्स की हत्या करने के लिए उस पर सटीक निशाना साधने के लिए क्रांतिकारी यही निशानेबाजी का अभ्यास करते थे। ब्रिटिश पुलिस से पहचान छिपाने के लिए इसी ठिकाने में शहीद भगत सिंह के केश और दाढ़ी काटी गई थी। इसे यादगार बनाने के लिए हर साल 23 मार्च पर लगने वाले शहीदी मेले में सियासी नेता कई घोषणाएं करते हैं लेकिन आज तक इसे क्रांतिकारियों की यादगार में तबदील नहीं किया है। दूर-दराज से लोग इसे देखने पहुंचते हैं लेकिन अफसोस है कि उन्हें यहां क्रांतिकारियों की जीवनी संबंधी कोई जानकारी नहीं मिलती है।
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फिरोजपुर के शहीदी स्मारक पर बनी शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु की समाधि।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जानकारी के अनुसार भगत सिंह और उनके क्रांतिकारी साथियों ने फिरोजपुर के तूड़ी बाजार (मोहल्ला शाहगंज) में दस अगस्त 1928 को गुप्त ठिकाना बनाया था। ब्रिटिश पुलिस को पता लगने के बाद क्रांतिकारी चार फरवरी 1929 को इसे छोड़कर चले गए थे। यह ठिकाना जरूरी गतिविधियों को ध्यान में रखकर बनाया गया था। यहां भगत सिंह के अलावा क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद, सुखदेव, शिव वर्मा, विजय कुमार सिन्हा, डॉ. गया प्रसाद, महाबीर सिंह व जय गोपाल का आना-जाना था।
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फिरोजपुर में बना क्रांतिकारियों का गुप्त ठिकाना।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
क्रांतिकारी गुप्त ठिकाने पर आते-जाते समय भेष बदलकर ट्रेनों में यात्रा करते थे। बम बनाने का सामान जुटाने के लिए क्रांतिकारी डॉ. निगम ने यहां निगम फार्मेसी और ड्रग्सिट की दुकान खोली थी। यहां केमिस्ट की दुकान खोलकर आर्थिक सहायता के लिए धनराशि इकट्ठी करते थे। बिहार में एक घटना को अंजाम देने के लिए भगत सिंह की पहचान छिपाने को यहीं उनके केश और दाढ़ी काटी गई थी।
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शहीद ए आजम भगत सिंह।
- फोटो : फाइल फोटो
यादगार बनाने का 2015 में जारी हो चुका है नोटिफिकेशन
खोजी लेखक राकेश कुमार ने बताया कि गुप्त ठिकाने में क्रांतिकारियों की गतिविधियों की खोज के बाद पुरातत्व विभाग ने इसे यादगार बनाने के लिए 17 दिसंबर 2015 को नोटिफिकेशन जारी किया था। मौजूदा समय में गुप्त ठिकाने की इमारत कृष्णा भक्ति सत्संग ट्रस्ट फिरोजपुर शहर के अधीन है। पुरातत्व विभाग ने ट्रस्ट के चेयरमैन रजिंदर पाल धवन निवासी मोहल्ला लाहौरियां वाला फिरोजपुर शहर से एक एग्रीमेंट किया था। रजिंदर पाल का कुछ वर्ष पहले निधन हो चुका है। पुरातत्व विभाग ने रजिंदर पाल से क्या एग्रीमेंट किया है, इसकी जानकारी आरटीआई के तहत मांगी गई थी, जो पुरातत्व विभाग ने नहीं दी है।
कांग्रेसी नेता सिद्धू ने यादगार बनाने के लिए ग्रांट देने का किया था वादा
जानकारों के मुताबिक 15 अगस्त 2017 में शहीदी स्मारक पर कांग्रेस के पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने क्रांतिकारियों के गुप्त ठिकाने को यादगार बनाने के लिए ग्रांट देने का वादा किया था। चार साल बीत गए, लेकिन अभी तक ग्रांट नहीं दी, जबकि सरकार कांग्रेस की है। यही नहीं पंजाब स्टूडेंट फेडरेशन व नौजवान सभा भी इसे यादगार बनाने के लिए फिरोजपुर में बड़े स्तर पर रोष मार्च निकाल चुकी है। इस शहीदी दिवस इन्होंने गुप्त ठिकाने पर कब्जा करने की घोषणा की थी, लेकिन किसान आंदोलन के कारण इसे फिलहाल टाल दिया है।