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जानिए क्या है पगड़ी संभाल आंदोलन, 114 साल पहले पंजाब में किसानों के आंदोलन से ही निकली थी ये लहर

Tue, 23 Feb 2021 11:55 AM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
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1907 में पंजाब में किसान आंदोलन में गाया गया था पगड़ी संभाल गीत। - फोटो : अमर उजाला
कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसान मंगलवार को पगड़ी संभाल जट्टा दिवस मना रहे हैं। रेवाड़ी बॉर्डर पर राजस्थान, हरियाणा, पंजाब व महाराष्ट्र के किसान अपने-अपने संगठन के रंग की पगड़ी पहनकर पहुंचे। इस पगड़ी संभाल लहर का जन्मदाता भी पंजाब है। 1907 में पंजाब में किसानों की एक रैली हुई थी। इसमें एक अखबार झांग स्याल के संपादक बांके दयाल ने एक गीत गाया था, जिसके बोले थे... पगड़ी संभाल जट्टा। इस गीत ने प्रदर्शनकारियों पर ऐसा असर डाला कि अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गया था। जिस आंदोलन में यह गीत गाया गया था, वह शहीद ए आजम भगत सिंह के चाचा अजीत सिंह ने छेड़ा था। अजीत सिंह 23 फरवरी 1881 को पंजाब के खटकड़ कलां गांव में पैदा हुए थे। उनके बड़े भाई किशन सिंह भगत सिंह के पिता थे। उनके छोटे भाई का नाम स्वर्ण सिंह था। उन्होंने भी स्वाधीनता संग्राम में हिस्सा लिया था। अजीत सिंह पंजाब के पहले आंदोलनकारियों में शामिल माने जाते हैं।   
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अजीत सिंह। - फोटो : फाइल फोटो
बात 1907 की है। भारत पर हुकूमत कर रहे अंग्रेजों ने एक कानून बनाया था। इस कानून का नाम कॉलोनाइजेशन एक्ट और दोआब बारी एक्ट था। इसमें नहर बनाने के नाम पर किसानों से उनकी जमीन हथिया ली गई थी और उन पर काफी टैक्स भी थोपे जा रहे थे। शहीद भगत सिंह के चाचा अजीत सिंह ने इसके खिलाफ आंदोलन छेड़ रखा था और वे किसानों को जागरूक कर रहे थे। 
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पगड़ी संभाल आंदोलन - फोटो : फाइल फोटो
तीन मार्च 1907 को लायलपुर (अब पाकिस्तान में है) में एक बड़ी रैली का आयोजन किया गया। उन दिनों पंजाब में एक अखबार प्रकाशित होता था। अखबार का नाम झांग स्याल था। बांके दयाल उसके संपादक थे। बांके दयाल काफी अच्छा लिखते और गाते थे। इसके अलावा वे किसानों को काफी जागरूक करते थे। 3 मार्च को हुई रैली में स्टेज पर बांके दयाल ने पगड़ी संभाल जट्टा गाना सुनाया। गीत का मुखड़ा था... पगड़ी संभाल जट्टा, पगड़ी संभाल ओए। गाना इतना प्रसिद्ध हुआ कि पूरे आंदोलन का नाम ही पगड़ी संभाल जट्टा आंदोलन पड़ गया।

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पगड़ी संभाल - फोटो : फाइल फोटो
इस गीत का किसानों पर काफी असर पड़ा और उन्होंने ब्रिटिशर्स के खिलाफ प्रदर्शन तेज कर दिए। किसानों के प्रदर्शन से अंग्रेज इतना डरे कि उन्होंने अजीत सिंह को 40 साल के लिए देश निकाला दे दिया। बाद में अजीत सिंह अफगानिस्तान, ईरान, इटली और जर्मनी तक गए और अपनी लड़ाई चालू रखी। सूत्रों के अनुसार, बाद में वे देश लौटे भी थे, लेकिन देश के विभाजन से बहुत दुखी हुए।
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स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह का जन्म 23 फरवरी 1881 को भारत में पंजाब के खटकड़ कलां गांव के सैन्य परिवार में हुआ था।  उनके दादाजी सरदार फतेह सिंह सिंहू थे और उनके बड़े भाई सरदार किशन सिंह थे जो सरदार भगत सिंह के पिता थे। अजीत सिंह पंजाब के पहले आंदोलनकारियों में शामिल माने जाते हैं। उन्होंने खुले तौर पर ब्रिटिश शासकों के सामने अपनी नाराजगी जताते हुए सरकार की सार्वजनिक रूप से अलोचना की। इसलिए अंग्रेज सरकार ने उन्हें एक राजनीतिक विद्रोही घोषित किया।
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