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एलपीयू बवाल की इनसाइड स्टोरी: 24 घंटे तक क्यों सुलगता रहा आक्रोश? रात में अफवाह, सुबह हाईवे जाम; शाम को आगजनी

Sun, 27 Sep 2026 10:31 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर।

सार

पूरे घटनाक्रम में पुलिस के सामने सबसे अलग चुनौती यह रही कि आंदोलन का कोई औपचारिक नेतृत्व नहीं था। न कोई छात्र संगठन सामने आया, न बैनर था और न कोई तय मंच। 
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में हिंसा - फोटो : अमर उजाला
रात में मोबाइल पर अफवाहनुमा संदेश वायरल हुए, सुबह जालंधर-फगवाड़ा हाईवे जाम हो गया और दिन में एलपीयू परिसर में तोड़फोड़ के साथ आगजनी तक पहुंच गया मामला। छात्रा से जुड़ी कथित घटना को लेकर सोशल मीडिया पर दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म और आत्महत्या जैसे अलग-अलग दावे तेजी से फैले। आधिकारिक पुष्टि के बिना चली इन सूचनाओं से छात्रावासों में बेचैनी बढ़ी और देखते ही देखते हजारों छात्र सड़कों पर आ गए। पुलिस ने सुबह अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दुष्कर्म के आरोप में एफआईआर दर्ज कर एसआईटी गठित की, लेकिन गुस्सा कम नहीं हुआ। रविवार शाम तक विश्वविद्यालय में तनाव का माहौल बना रहा।
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में हिंसा - फोटो : अमर उजाला
रात दो बजे हाईवे पर पहुंचा आक्रोश
शनिवार रात करीब पौने दो बजे पुलिस को विश्वविद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में छात्रों के जुटने की सूचना मिली। मौके पर पहुंची पुलिस को पता चला कि छात्रों के बीच कथित घटना को लेकर अलग-अलग संदेश चल रहे हैं। रात करीब दो बजे छात्रों का आक्रोश विश्वविद्यालय से बाहर निकलकर जालंधर-फगवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंच गया और हाईवे जाम कर दिया गया। विश्वविद्यालय ने सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को गलत और भ्रामक बताते हुए आधिकारिक सूचना पर भरोसा करने की अपील की। पुलिस का कहना था कि शुरुआत में उसे ऐसी घटना की कोई शिकायत नहीं मिली थी। लेकिन सोशल मीडिया पर तेजी से फैलती सूचनाओं के बीच आधिकारिक स्पष्टीकरण का असर सीमित रहा।
 
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में हिंसा - फोटो : अमर उजाला
एफआईआर और एसआईटी के बाद भी नहीं थमा गुस्सा
सुबह छात्रों के बयान के आधार पर पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। जांच के लिए विशेष जांच दल बनाया गया। विश्वविद्यालय ने भी छात्रों के प्रतिनिधियों को जांच प्रक्रिया में शामिल करने की बात कही। इसके बावजूद परिसर में गुस्सा बना रहा और बाद में तोड़फोड़ व आगजनी की घटनाएं सामने आईं।

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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में हिंसा - फोटो : अमर उजाला
भीड़ सामने थी, नेता कोई नहीं
पूरे घटनाक्रम में पुलिस के सामने सबसे अलग चुनौती यह रही कि आंदोलन का कोई औपचारिक नेतृत्व नहीं था। न कोई छात्र संगठन सामने आया, न बैनर था और न कोई तय मंच। अलग-अलग छात्रावासों से छात्र अपने स्तर पर जुड़ते गए। ऐसे में पुलिस के लिए यह तय करना मुश्किल रहा कि पूरी भीड़ की ओर से किससे बातचीत की जाए।
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में हिंसा - फोटो : अमर उजाला
एक वीडियो के बाद दूसरी चर्चा, बदलता रहा माहौल
जिस सोशल मीडिया पर रात में कथित घटना से जुड़े संदेश फैले, उसी पर दिन में तोड़फोड़ और आगजनी के वीडियो भी प्रसारित होने लगे। हर नए वीडियो और संदेश के साथ छात्रों के बीच नई चर्चा होती रही। एक जगह स्थिति संभलती दिखती तो दूसरी जगह से फिर तनाव की सूचना आने लगती।
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लपीयू में बवाल बढ़ा - फोटो : अमर उजाला
35 हजार छात्रों की यूनिवर्सिटी में भारी पुलिस बल
एलपीयू में करीब 35 हजार छात्र पढ़ते हैं और बड़ी संख्या में विद्यार्थी परिसर के छात्रावासों में रहते हैं। घटनाक्रम बढ़ने के बाद कई जिलों से वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और अतिरिक्त पुलिस बल को बुलाया गया। डीआईजी नवीन सिंगला ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालने की कमान संभाली। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ छात्रों को समझाने की कोशिश की। रविवार शाम तक माहौल पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया। 24 घंटे के इस घटनाक्रम ने यह दिखाया कि सोशल मीडिया से शुरू हुआ आक्रोश कितनी तेजी से बड़े जमावड़े और फिर कानून-व्यवस्था की चुनौती में बदल सकता है। सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि हजारों की भीड़ सामने हो लेकिन उसका कोई एक नेता न हो तो पुलिस आखिर बातचीत किससे करें?
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