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बड़ा खुलासा: जानिए, आखिर मंगल ग्रह पर है कितना पानी?

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हमारी धरती के बाद अब मंगल ग्रह पर भी जीवन की उम्मीद बढ़ गई है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने सोमवार को नया खुलासा किया है कि लाल ग्रह पर तरल रूप में बहते हुए पानी के पर्याप्त भंडार हैं। यह पानी नमकीन रूप में है। नासा ने हाल ही में कहा था कि वह जल्द ही बड़ा खुलासा करने वाला है, तभी से लाल ग्रह के बारे में दुनिया भर में उत्सुकता बढ़ गई थी। धरती के बाद किसी दूसरे ग्रह पर पहली बार बहते हुए पानी के साक्ष्य पाए जाने का खुलासा हुआ है। अमेरिका और फ्रांस के वैज्ञानिकों की टीम ने यह पता लगाया है कि मंगल की सतह पर बड़ी मात्रा में नमक और खनिज से भरपूर तरल रूप में पानी है।
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वैज्ञानिकों के इस नतीजे से अब तक मंगल पर पानी के होने के दावे पर एक तरह से मुहर लग गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मंगल पर 2011 में यान मार्स रिकोनेसेंस ऑर्बिटर से प्राप्त तस्वीरों में जो गहरी लकीरें पाई गई थीं, वे दरअसल बहता हुआ तरल पानी ही है, जो मंगल के कई हिस्सों में देखी गई थीं। अटलांटा में जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेकभनॉलॉजी में वैज्ञानिक और शोध के सह लेखक व नेपाली वैज्ञानिक लुजेंद्र ओझा कहते हैं कि हमारा शोध भविष्य में इस दिशा में आगे बढ़ने में सहायक होगा। नासा के तारामंडल विज्ञान निदेशक जिम ग्रीन ने कहा कि नए शोध ने यह तय कर दिया है कि मंगल शुष्क ग्रह नहीं है, यह अब अतीत की बात हो गई है। तरल पानी की मौजूदगी से मंगल पर जीवन की संभावना बढ़ गई है।
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पानी की मौजूदगी से नासा के 2030 में अगले मानव मिशन को भेजा जाना आसान हो जाएगा। सबसे अहम बात यह है कि विरल हवा वाले मंगल ग्रह पर पाए गए ये नमक पानी के जमने और भाप बनने के तापमान को भी बदल सकते हैं, जिससे पानी ज्यादा समय तक सतह पर बह सकता है। इससे पहले शोधकर्ता अब तक यह कयास लगाते रहे हैं कि क्या अब भी मंगल की सतह पर पानी बहता होगा। वैज्ञानिकों का अनुमान था कि मंगल पर जमी हुई बर्फ के रूप में पानी है।  इसी साल नासा के यान क्यूरियोसिटी ने भी मंगल की सतह पर पानी होने के ठोस सबूत दिए थे। यह शोध जर्नल नेचर जियोसाइंस में प्रकाशित हुआ है।

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माना जा रहा है कि मंगल पर पानी इतनी बड़ी मात्रा में मौजूद है कि उससे सैकड़ों झीलें और नदियां बन सकती हैं। ये लकीरें सैकड़ों मीटर लंबी और पांच मीटर चौड़ी तक पाई गई हैं। नासा का यह खुलासा उस वक्त हुआ है, जब अभिनेता मैट डिमोन की हॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘द मार्सियन’ की चर्चा गर्म है। यह फिल्म मंगल ग्रह पर भेजे जाने वाले एक मिशन के बारे में है, जिसमें अभिनेता को मरा हुआ जानकर मंगल पर ही अंतरिक्ष यात्री छोड़ देते हैं, जो किसी तरह वहां के वातावरण से तालमेल बिठाते हुए आखिर में धरती पर सकुशल वापस आ जाता है।
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नासा की ओर से लाल ग्रह पर पानी के निशान खोजने में सबसे बड़ी भूमिका नेपाल के युवा अंतरिक्ष विज्ञानी लुजेंद्र ओझा की रही। ओझा ही ऐसे पहले शख्स रहे जिन्होंने ठोस आधार पर अपनी खोज से नासा को यह भरोसा दिलाया कि मंगलग्रह पर पानी के निशान हो सकते हैं। इसी के बाद सोमवार को नासा ने अपने बयान में मंगल ग्रह का रहस्य सुलझाने का दावा किया। ओझा वर्तमान में अटलांटा स्थित जॉर्जिया इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी से पीएचडी कर रहे हैं।  चार साल पहले उन्होंने हाई रेज्योल्यूशन इमैजिंग साइंस एक्सपेरिमेंटल कैमरे से अध्ययन के आधार उन्होंने पानी के निशान होने की बात कही थी। ओझा की उम्र उस वक्त महज 21 साल थी और उन्होंने अपना स्नातक भी पूरा नहीं किया था। बाद में नासा ने उन्हें खोज अभियान में शामिल भी कर लिया।
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पनप सकता है जीवन-मंगल ग्रह पर पानी होने से छोटे-छोटे जीवाणु पनप सकते हैं, जो जीवन के विकास की शुरुआती अवस्था के लिए जरूरी हैं. अंतरिक्ष यात्रियों के लिए एक और ठिकाना मिल सकता है.दुनिया की बढ़ती आबादी को संभालने के लिए मंगल धरती का एक और विकल्प हो सकता

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मंगल पर नासा
06 अगस्त, 2012 : नासा का सबसे आधुनिक अंतरिक्ष यान क्यूरोसिटी सफ लता पूर्वक मंगल पर उतरा।
08 अगस्त, 2012 : विशाल क्यूरोसिटी रोवर ने इस ग्रह की पहली रंगीन तस्वीर भेजीं
23 अगस्त, 2012 : मंगल के क्षितिज पर रहस्यमयी सफेद प्रकाश नजर आने के साथ आकाश में चार धब्बे भी तैरते दिखाई दिए
28 सितंबर, 2012 : क्यूरोसिटी रोवर ने लाल ग्रह पर कभी तेज बहाव वाले पानी की धारा का सुबूत खोज निकाला। वैसे मंगल पर पानी की मौजूदगी का सुबूत पूर्व में भी ढूंढा जा चुका था, लेकिन यह पहला मौका था जब चट्टानों की नवीनतम तसवीरों में प्राचीन बजरी दिखी।
19 अक्तूबर, 2012 : पृथ्वी से लाल ग्रह की समानताएं तलाशने गए क्यूरोसिटी रोवर को कुछ और दिलचस्प चीजें मिली हैं। मंगल ग्रह की सतह के नमूने जमा करने के दौरान रोवर को कुछ ऐसी चीजें मिली हैं जो काफी चकमदार हैं। रोवर ने ग्रह की सतह से कुछ चमकीले रंग के पिंड मिले हैं।

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4 दिसंबर, 2012 : क्यूरियोसिटी ने वहां कुछ ऐसे सुबूत तलाशे जो इस लाल ग्रह पर कभी रहे जीवन की ओर इशारा करते थे। मंगल की ऊपरी सतह की मिट्टी से निकाले गए सरल कार्बनिक यौगिकों की पहचान से इस बात के संकेत मिलते हैं कि वहां कभी जीवन अवश्य रहा होगा।
मंगल ग्रह पर भारत का मंगलयान
5 नवंबर, 2013 को इसरो द्वारा श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी सी-25 द्वारा मंगलयान का सफल प्रक्षेपण किया गया था।
30 नवंबर 2013 : मंगलयान को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से बाहर निकाला गया
सूर्य की कक्षा में मंगलयान की अंतरिक्ष यात्रा शुरू हुई जो करीब 68 करोड़ किलोमीटर की थी।
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2 दिसंबर, 2013 : यान 3.85 लाख किमी की चांद की कक्षा से बाहर निकला
8 अप्रैल, 2014 : 33.75 करोड़ किमी की यात्रा पूरी
15 अगस्त, 2014 : 90 फीसदी सफर पूरा हुआ
10 सितंबर, 2014 : 64.3 करोड़ किलोमीटर की दूरी तय
24 सितंबर, 2014 : लाल ग्रह की कक्षा में प्रवेश किया
24 मार्च, 2015 : मंगलयान ने मंगल की कक्षा में 6 महीने पूरे किए
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