एक तरफ यूरोपीय देशों में बुरके पर आपत्ति जताई जा रही है और दूसरी तरफ कई यूरोपीय देशों में औरतें हिजाब और नकाब को स्वेच्छा से अपना रही हैं। जानिए बुरका, हिजाब और नकाब जैसे पहनावों के बीच का फर्क।
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बुर्के जैसे नहीं हैं हिजाब और नकाब, जानिए इनके बीच का फर्क
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हिजाब हिजाब शब्द का अर्थ पूरे शरीर को ढकने से है लेकिन मुस्लिम महिलाएं इससे सिर और गर्दन को ढकने के लिए इस्तेमाल करती हैं। आधुनिक मुसलिम देशों में हिजाब प्रचलन में है। ये किसी भी रंग और स्टाइल का हो सकता है।
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नकाब नकाब भी एक तरह का पर्दा है जो मुस्लिम महिलाओं द्वारा पहना जाता है, इसमें हिजाब की तुलना में शरीर ज्यादा ढका होता है। इसे पहनने वाली महिला की सिर्फ आंखें खुली रहती है। इसे इस तरह से बांधते हैं कि आंखों को छोड़कर पूरा चेहरा, गर्दन और बाल तक ढक लिए जाते हैं। इसमें देखने के लिए आखों के पास के हिस्से को खिड़की की तरह खोल दिया जाता है। कई देशों की औरतें जालीदार नकाब पहनती हैं जिसमें आखों को भी जाली से ढक दिया जाता है।
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बुर्का बुर्का मुस्लिम महिलाओं के शरीर को सबसे ज्यादा ढकने वाला पहनावा है। ये एक तरह का लबादा है जो सिर से पैर तक पूरे जिस्म को ढक लेता है। आमतौर पर बुर्का एक ही कपड़े से बनता है। इसे इस तरह से सिला जाता है कि आंखों के सामने बारीक जाली होती है जिससे कि महिला देख सके। सऊदी अरब और सीरिया जैसे देशों में महिलाओं के लिए बुरका पहनना जरूरी है।
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अल-अमायरा अल-अमायरा यूं तो हिजाब की तरह होता है लेकिन हिजाब से अलग ये दो कपड़ों से बना होता है। पहले कपड़े से सिर को कैप की तरह फिटिंग से ढका जाता है जबकि दूसरे कपड़े से गर्दन को ढका जाता है।
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अबाया अबाया शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के अबायत से हुई है। अबाया दरअसल दो कपडों का मेल है। पहले में एक गाउन आता है जिसमें महिलाओं की गर्दन से लेकर पैरों तक पूरा शरीर ढका जाता है। दूसरे कपड़े को रूमाल की तरह हिजाब के तौर पर पहना जाता है। इस पूरे पहनावे को ही अबाया कहते हैं। इस पहनावे का चलन उत्तरी अफ्रीका के मुस्लिम देशों में काफी ज्यादा है।
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शायला शायला हिजाब की तरह एक लंबा कपड़ा जिससे सिर और गर्दन को ढकने के बाद कंधों पर डाल लिया जाता है। शायला अरब देशों में काफी ज्यादा चलन में है।
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खिमार इस्लामिक पहनावों से खिमार भी काफी चलन में है। यह हिजाब की तरह ही होता है लेकिन इसमें कमर और हाथ भी ढके होते है। हालांकि यह फिटिंग में नहीं सिला होता बल्कि हिजाब के ऊपर ही चादर की तरह पहना जाता है। नकाब से उलट इसमें महिला का चेहरा बिल्कुल साफ दिखाई देता रहता है।
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चादर ईरान की अधिकांश महिलाओं में चादर पहनने का चलन है। महिलाएं जब घर के बाहर निकलती हैं तो पूरे शरीर पर काले या किसी गहरे रंग की चादर ओढ़ लेती हैं।। कुछ महिलाएं इस चद्दर के नीचे भी सिर पर एक छोटा दुपट्टा डालती हैं।
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जिलबाब मुस्लिम महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले लंबे और ढीले कोट को जिलबाब नाम से जानते हैं। यह बुरके का विकल्प है जो सर्दियों में पहना जाता है। इसे पहनने से पहले औरतें हिजाब पहनती और फिर लंबी बाजू वाले पैरों को ढकते जिलबाब को। जिलबाब चूंकि बुरके का विकल्प है इसलिए इसे पश्चिमी देशों मुस्लिम महिलाएं ज्यादा पहनती हैं। जिलबाब पहनने वाली महिलाएं सिर ढकने के लिए खिमार भी पहनती हैं।