ग्यारह सितंबर की सुबह अमेरिका कभी नहीं भूल सकता। अमेरिका ही क्या उस दिन पूरे विश्व के लिए आतंकवाद की परिभाषा ही बदल गई थी।
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9/11- कोई अमेरिकी इन तस्वीरों को नहीं देखना चाहता
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सुबह का समय और न्यूयॉर्क शहर के मशहूर वर्ल्ड ट्रेड सेंटर यानी ट्विन टॉवरों में बने सैंकड़ों दफ्तर रोज की तरफ जोशो खरोश से खुले थे। लेकिन नौ बजते ही मौत ने एकाएक वहां तबाही मचा दी।
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आतंकी संगठन अल कायदा के 19 आतंकियों द्वारा अगवा किए गए दो यात्री विमान इन टॉवरों से भिड़ा दिए गए। विमानों में भी सैंकडों मासूम लोग थे।
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पहला विमान 8.46 बजे नॉर्थ टॉवर से टकराया और कुछ ही देर बाद दूसरा विमान 9.03 बजे साउथ टॉवर में जा घुसा।
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विमानों के टॉवरों से टकराते ही सदी की सबसे बड़ी आतंकी घटना का कहर शुरू हो गया। महज एक घंटे में विश्वस्तरीय आर्किटेक्चर और सुविधाओं से लैस दोनों टॉवर भरभरा कर जमींदोज हो गए।
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विमानों में बंदी यात्रियों के साथ साथ टॉवरों में मौजूद लोग बेमौत आतंकवाद की भेंट चढ़ गए।
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ये घटना जिस तेजी से हुई उससे संभलने का मौका नहीं मिला लेकिन ये वाकया इतिहास में सबसे बड़े आतंकी हमलों में शुमार हो गया।
9/11- कोई अमेरिकी इन तस्वीरों को नहीं देखना चाहता
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कहा जाता है कि हमलों में करीब तीन हजार लोग मारे गए। इस हमले में वो उन्नीस आतंकी भी मारे गए जिन्होंने विमानों का अपहरण कर उन्हें टॉवरों से टकराया था।
9/11- कोई अमेरिकी इन तस्वीरों को नहीं देखना चाहता
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9.37 मिनट पर जब दुनिया इन हमलों से जूझ रही थी तो आतंकियों ने तीसरा विमान पैंटागन स्थित सैना मुख्यालय पर टकरा दिया। इस विमान में भी 83 लोग सवार थे।
हमले की जिम्मेदारी अल कायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन ने ली। हालांकि कई सालों के मिशन के बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने लादेन को खोजकर मार डाला। लेकिन उस खूबसूरत वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले ने आतंकवाद को और ज्यादा वीभत्स और लाइलाज बना दिया और उस इमारत की भी तस्वीर ही बदल कर रख दी।