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वोट का अधिकार मिला लेकिन कार चलाने को तरसती हैं महिलाएं

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सऊदी अरब में महिलाओं को पहली बार नगर निगम चुनावों में शामिल होने और वोट देने का अधिकार मिला जिसको वहां की मुस्लिम महिलाओं की सबसे बड़ी आजादी के रूप में देखा जा रहा है। इस चुनाव में महिला उम्मीदवार भी शामिल हुई जिनमें से एक ने मक्का क्षेत्र का चुनाव जीत भी लिया।
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लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सऊदी की औरतों को वो सभी अधिकार मिल गए जो उन्हें मिलना चाहिए था। आइए जानते हैं आखिर वो कौन-कौन से अधिकार हैं जो उन्हें आज तक नहीं मिले।
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सऊदी की महिलाएं बिना किसी पुरुष परिजन के कहीं यात्रा पर नहीं जा सकती।
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वहां की मुस्लिम महिलाएं अपने मर्जी से अपनी शादी नहीं कर सकती। इसके लिए उनके परिजनों का राजी होना जरूरी है।
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वे बिना अपने परिजनों के अनुमति के बाहर जाकर काम भी नहीं कर सकतीं।
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अगर वह सार्वजनिक स्थलों पर जाती हैं तो उनका बुर्का पहनना बेहद जरूरी है।

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उन्हें पुरुषों के साथ बराबरी का दर्जा भी हासिल नहीं है। इसका मतलब यह है कि वह पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम नहीं कर सकती। पुरुषों की तुलना में बेहद कम छूट मिलती है।
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वे अपरिचित पुरुषों के साथ किसी सार्वजनिक स्थलों (रेस्टोरेंट आदि) पर बातचीत या मिलजुल नहीं सकतीं।
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