इन्फर्टिलिटी केवल बच्चा न पैदा कर पाने की बेबसी नहीं हैं। ये बीमारी वजन, इन्सुलिन, गुर्दे और टिश्यू को भी प्रभावित करती है। ये मर्द हो या औरत किसी को भी प्रभावित कर सकती है।
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मर्द हो या औरत, दूर कर लें नपुंसकता और बांझपन से जुड़े ये भ्रम
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अगर आप इसके शिकार हैं तो ये मत समझिए कि आप या आपका साथी अकेले दोषी हैं। विश्व की 7 फीसदी से ज्यादा आबादी 15 से 44 साल की उम्र के दरमियान इसका शिकार बनती है।
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इन्फर्टिलिटी का इलाज संभव है। ये एक ऐसी बीमारी है जो आपके दांपत्य जीवन के साथ साथ आपके शरीर, संबंधों और सामाजिक जीवन, फ्यूचर प्लान को भी प्रभावित करती है।
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एक साल तक असुरक्षित सेक्स के बावजूद अगर महिला मां नहीं बन पाती है तो उसे अधिकृत रूप से इन्फर्टिलिटी की जांच के लिए भेजा जाती है। 35 साल की महिला और उससे ज्यादा उम्र की महिला अगर छह माह तक असुरक्षित सेक्स के बावजूद मां न बन पाए तो उसे भी इसी जांच के लिए तैयार रहना चाहिए।
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इन्फर्टिलिटी के लिए कोई एक तत्व जिम्मेदार नहीं। ये यौन संक्रमित बीमारियों, ऑटोइम्यून डिसऑर्डर, कैंसर ट्रीटमेंट, बढ़ते वजन और लगातार धूम्रपान के चलते भी हो सकती है।
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इन्फर्टिलिटी ट्यूबल ब्लॉकेज, ऑवेल्यूशन डिस्फंक्शन, मंत्र संबंधी विकार और उम्र के चलते भी हो सकती है। अगर आप सोचते हैं कि ज्यादा शराब, कॉफी और धूम्रपान का इन्फर्टिलिटी से कोई रिश्ता नहीं तो आप गलत हैं। इन सभी का इन्फर्टिलिटी बढ़ाने में योगदान है।