अयंगर के आगे फीकी लगेगी रामदेव की कपालभाती
Thu, 21 Aug 2014 08:10 PM IST
प्रख्यात योगाचार्य और अयंगर इंस्टीट्यूट ऑफ योग के संस्थापक बीकेएस आयंगर का बुधवार को पुणे में निधन हो गया।
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आयंगर का उपचार करने वाली डॉ. दीपाली मांडे के अनुसार बीमार होने के बावजूद वे अस्पताल में भर्ती नहीं होना चाहते थे।
अयंगर के आगे फीकी लगेगी रामदेव की कपालभाती
96 साल के अयंगर दुनिया के सबसे बुजुर्ग योगगुरु और आधुनिक ऋषि के रूप में विख्यात थे।
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सांस की तकलीफ के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया और गुर्दे फेल होने के बाद उन्हें रविवार से जीवनरक्षक प्रणाली (डॉयलिसिस) पर रखा गया था।
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14 दिसंबर सन 1918 में कर्नाटक के कोल्लार जिले के वेल्लूर में एक गरीब ब्राह्मण परिवार में जन्मे आयंगर अपनी माता-पिता की 11वीं संतान थे।
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बचपन में रोग से परेशान होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें योग करने की सलाह दी थी।
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अपने स्वास्थ्य लाभ के लिए उन्होंने योग शुरू किया तो जीवनभर योग में लीन रहे।
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1934 में आयंगर ने मैसूर में योग का प्रशिक्षण लिया और उसके बाद 1937 में योग के प्रचार प्रसार के लिए पुणे में बस गए।
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974 में उन्होंने योग प्रशिक्षण संस्था स्थापित की और धीरे-धीरे 137 देशों में उनके योग संस्थान खुल गए।
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उन्हीं के कारण भारतीय योग दुनिया भर में जाना गया।
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योग के प्रचार प्रसार में रामदेव की भी अहम भूमिका है।
अयंगर के आगे फीकी लगेगी रामदेव की कपालभाती
90 साल की उम्र में भी आयंगर करीब तीन घंटे प्रतिदिन योग करते थे। रामदेव भी अपने योग के कारण देश भर में विख्यात हैं।
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2004 में टाइम्स मैगजीन ने आयंगर को विश्व के 100 प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में स्थान दिया था।
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रामदेव योग के अतिरिक्त अपनी दवाओं के लिए भी जाने जाते हैं।