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योग का करिश्मा! कुछ इस तरह बदली इनकी जिंदगी

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योग दिवस को लेकर भले अभी धूम मची है लेकिन ये ऐसे चेहरे हैं जिनकी जिंदगी योग ने बदल दी। किसी को लंबी उम्र मिली तो किसी को शारीरिक लाचारी से मुक्ति।
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योग का करिश्मा! कुछ इस तरह बदली इनकी जिंदगी

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मेरठ के पांच वर्षीय मो. जैद अंसारी की योग मुद्राएं देखते बनती हैं। बाबा रामदेव के पतंजलि योग संस्थान ने जैद को सबसे कम उम्र का योगी घोषित कर रखा है। हरिद्वार में 2014 में आयोजित राष्ट्रीय जूनियर योग चैंपियनशिप में जैदी को पदक मिला था।
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तीस जनवरी को दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर जैदी ने विशेष पुरस्कार प्राप्त किया। इसी साल नोएडा में आयोजित यूपी योग चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। अब पतंजलि के निमंत्रण पर मो. जैद अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होगा।

योग का करिश्मा! कुछ इस तरह बदली इनकी जिंदगी

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अमरोहा जनपद के गांव सिरसा मोहन निवासी मान सिंह उर्फ मेंबर साहब की पैदाइश वर्ष 1914 की है। खास बात यह है कि 101 साल की उम्र में भी  वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
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चार महीने पहले वह लकवे का शिकार हो गए। शरीर के आधे हिस्से ने काम करना बंद कर दिया। चिकित्सक भी कहने लगे थे इस उम्र में रिकवरी संभव नहीं है। लेकिन मान सिंह ने हिम्मत नहीं हारी। दवाएं तो चलती ही रहीं योग भी जारी रखा। दो महीने में वह पूरी तरह स्वस्थ हो गए। मान सिंह के परिवार वालों का कहना है कि वह सुबह शाम योग करते है।
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फरीदाबाद के सेक्टर-16 निवासी शिक्षिका ममता शर्मा मई 2007 में घर में गैस लीक होने के चलते सिलेंडर धमाके के कारण बुरी तरह से झुलस गई थी। हादसे में उनके दोनों हाथ और दोनों पैरों की नसें आपस में जुड़ गईं। वह न तो खड़ी हो पाती और न ही चल पाती थीं। उन्हें दो लोग उठाते-बैठाते थे। चिकित्सकों ने उन्हें ऑपरेशन के लिए कहा था। मार्च 2008 से वह योग शिविर में जाने लगी। आज वह पूरी तरह से स्वस्थ हो गईं। अब उन्हें सहारे की जरूरत नहीं पड़ती। वह खुद कई संस्थाओं से जुड़कर योग शिविर में दूसरों को योग सिखाती हैं।
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बरेली के हरुनगला की रहने वाली 48 वर्षीय कुसुम लता पटेल दिल की बीमारी से परेशान थीं। उनके सीने में दर्द होता था। दो बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। डॉक्टरों ने आपरेशन की सलाह दी थी, लेकिन रिश्तेदार की सलाह पर प्राकृतिक और योग चिकित्सा से उपचार कराया। ढाई माह बाद परिणाम यह है कि न तो दिल में दर्द की शिकायत है और न ही उलझन।
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