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यमुना एक्सप्रेसवे: 10 दिन में 14 हादसे, 7 की मौत

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यमुना एक्सप्रेसवे पर रफ्तार का रोमांच लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। बेलगाम स्पीड से दौड़ते वाहन हादसे का शिकार हो रहे हैं। इसके अलावा सर्दी के मौसम में भी एक्सप्रेसवे पर वाहनों के टायर फटने का सिलसिला जारी है। कोहरा भी अपना कहर बरपा रहा है। पिछले 10 दिन में एक्सप्रेसवे पर 14 हादसों में सात लोगों की मौत हो गई। 49 लोग घायल हुए हैं। मथुरा जिले में 42 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे पर जनवरी में हादसों का ग्राफ बढ़ा है। एक दिन भी बिना हादसे के नहीं गुजर रहा है।
कुशल प्रताप/अमर उजाला, मांट
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यमुना एक्सप्रेसवे: 10 दिन में 14 हादसे, 7 की मौत

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आंकड़ों पर गौर करें तो हर 48वें घंटे में एक्सप्रेसवे पर हादसे में एक मौत हो रही है। एक जनवरी से 10 जनवरी तक 14 हादसे हुए हैं। सबसे अधिक हादसे टायर फटने से हुए। रफ्तार की इस सड़क पर अक्सर लोग स्पीड का ध्यान नहीं रखते हैं और ऐसे में गाड़ियों के टायर गर्म होकर फट जाते हैं। कई बार आवारा जानवर, कोहरा और चालक को नींद आने के कारण भी हादसे हुए हैं।
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यमुना एक्सप्रेसवे: 10 दिन में 14 हादसे, 7 की मौत

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बीते 10 दिन में हुए हादसे
1 जनवरी-माइल स्टोन 97 पर बाइक रिक्शा से टकराई, चार घायल।
2 जनवरी-माइल स्टोन 132 पर बाइक कोहरे में डिवाडर से टकाराई, दो घायल।
3 जनवरी-माइल स्टोन 70 पर टायर फटने से सेंट्रो कार सवार एक महिला सहित तीन लोग घायल।
5 जनवरी-किलोमीटर 69 पर नोएडा से आ रही कार नीलगाय से टकराई, चार घायल, एक की मौत।

यमुना एक्सप्रेसवे: 10 दिन में 14 हादसे, 7 की मौत

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7 जनवरी-किलोमीटर 73 पर थाना नौहझील क्षेत्र में पुलिस की बोलेरो टायर फटने से पलटी, दरोगा सहित छह लोग घायल। 8 जनवरी-माइल स्टोन 63 पर थाना नौहझील क्षेत्र में घने कोहरे में 14 वाहन भिड़े। एक की मौत, 26 लोग घायल। 10 जनवरी-माइल स्टोन 79 पर कोतवाली सुरीर क्षेत्र में क्वालिस कार का टायर फटने से पलटी, चार महिलाओं की मौके पर मौत, चार घायल उनमें से एक और ने दम तोड़ा।
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यमुना एक्सप्रेसवे: 10 दिन में 14 हादसे, 7 की मौत

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तेज रफ्तार बनी मौत का कारण-यमुना एक्सप्रेसवे पर निर्धारित गति से अधिक गति में गाड़ी दौड़ाने और स्पीड का लुत्फ उठाने के प्रयास में रूपेंद्र गुप्ता का पूरा परिवार हादसे का शिकार हो गया। सुरीर कोतवाली क्षेत्र में हुए हादसे में उनकी पत्नी अनामिका दत्ता, बेटी आठ वर्षीय निकिता दत्ता, 11 वर्षीय विपासा और बेटा 20 वर्षीय दिग्विजय दत्ता के अलावा साली की भी मौत हो गई। एक्सप्रेसवे के सूत्रों के अनुसार एक्सप्रेसवे पर पुराने वाहनों के लिए 80 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम गति निर्धारित है। इसके लिए जगह-जगह गति नियंत्रण के सूचक बोर्ड लगे हैं। हादसे के दौरान पीड़ितों की क्वालिस गाड़ी 109 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से दौड़ रही थी। इसी दौरान टायर फटने से गाड़ी का चालक शंभू संतुलन खो बैठा।
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यमुना एक्सप्रेसवे: 10 दिन में 14 हादसे, 7 की मौत

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यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसे के शिकार हुए एनआरआई रूपेंद्र दत्ता ने बताया कि वे 11 दिसंबर को दिल्ली आए थे। आस्ट्रेलिया में रेस्टोरेंट संचालक रूपेंद्र को 15 जनवरी को लौटकर जाना था। रिश्तेदारों के आने पर आगरा ताजमहल घूमने का प्लान बनाया। चालक ने बताया कि आगे का टायर फटने के बाद जब ब्रेक लगाई तो पीछे का भी टायर फट गया था। हादसा इतना भयानक था बालिका के पैर अलग कटकर गिर गए।

पिछले वर्ष हुई 57 की मौत, 590 घायल
रफ्तार की सड़क पर इस वर्ष पिछले वर्ष की अपेक्षा हादसों का ग्राफ  और बढ़ गया। रफ्तार की रोमांच में बड़ी संख्या में लोगों की मौत। सबसे अधिक हादसे ओवर स्पीड की वजह से हुए हैं। यमुना एक्सप्रेसवे पर वर्ष 2015 में एक जनवरी से 26 दिसंबर तक 400 से अधिक हादसों में 57 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। 210 गंभीर रूप से घायल हो गए। 380 को मामूली चोट आई।
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