अगर आप भी व्हाट्स एप यूज करते-करते किसी झमेले में न फंस जाए, इसलिए समय रहते ही सचेत हो जाना चाहिए। अमन के दुश्मन माहौल में नफरत का जहर घोलने के लिए सोशल मीडिया को लगातार हथियार बना रहे हैं। शमसाबाद का बवाल फेसबुक की एक भड़काऊ पोस्ट ने ही कराया था। इसके बाद पुलिस ने फेसबुक और व्हाट्स एप ग्रुप की निगरानी तेज तो की, लेकिन खुराफाती बाज नहीं आए। ब्यूरो/अमर उजाला, आगरा।
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100 व्हाट्स एप ग्रुप पर पुलिस की नजर, रहिए इनसे दूर
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दादरीकांड के बाद गोकशी को लेकर लगातार धार्मिक भावना भड़काने वाले मैसेज पोस्ट किए जा रहे हैं। हार्दिक पटेल के आंदोलन की आड़ लेकर आरक्षण की आग भी सुलगाई जा रही है। अगर आपको सोशल मीडिया पर कोई आपत्तिजनक मैसेज या तस्वीर नजर आती है तो आप रेंज साइबर सेल पर कर सकते हैं शिकायत।
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डीआईजी की साइबर सेल ने भड़काऊ मैसेज पोस्ट करने वाले ऐसे 20 व्हाट्स ग्रुप बंद कराने के लिए व्हाट्स एप कंपनी को लिखा है। कार्रवाई के लिए 10 फेसबुक ग्रुप भी चिह्नित कर लिए गए। कुल 100 ग्रुप पर पुलिस की नजर है। इनमें से ज्यादातर के ग्रुप एडमिन आगरा के ही रहने वाले हैं।
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पुलिस तीन स्टेप में कार्रवाई कर रही है। पहले ग्रुप बंद कराया जाता है। इसके बाद ग्रुप एडमिन को नोटिस भेजकर चेतावनी दी जाती है। अगर बाज न आए तो उसके खिलाफ केस दर्ज किया जाता है। साइबर सेल के सूत्रों का कहना है कि गुजरात के युवा नेता हार्दिक पटेल के आंदोलन पर आरक्षण के पक्ष और विपक्ष में मैसेज चल रहे हैं। इनमें कई आपत्तिजनक हैं। व्हाट्स एप ग्रुप पर इन्हें ट्रेस किया गया है।
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पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी की धार्मिक भावना या आस्था आहत करने वाले मैसेज पर आईपीसी की धारा में केस दर्ज किया जा सकता है। अगर किसी पोस्ट पर बवाल हो जाता या सांप्रदायिक अथवा जातीय तनाव फैल जाता है, तो उसके खिलाफ रासुका के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। शमसाबाद प्रकरण में फेसबुक पर आपत्तिजनक मैसेज पोस्ट करने के आरोपी पर पुलिस एनएसए लगा चुकी है।