दंगाई के हाथ में भगवा झंडा थमाना यूपी पुलिस को महंगा पड़ गया। साथ ही विपक्ष को भी प्रदेश सरकार पर हमला बोलने का मौका मिल गया। पुलिस लाइन में शुक्रवार को आयोजित दंगा नियंत्रण की रिहर्सल एक बड़े विवाद का कारण बन गई। (सभी फोटो और रिपोर्ट: अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद)
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'दंगाई’ के हाथ में पुलिस ने थमा दिया भगवा झंडा
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गुजरात में रिहर्सल के दौरान दंगाइयों के सिर पर टोपी गुजरात सरकार के गले की हड्डी बनी तो इलाहाबाद में दंगाई के हाथ में लहराते भगवा झंडे ने सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया।
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रिहर्सल के थोड़ी ही देर बाद विवाद इतना बढ़ गया कि भाजपाई और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) सहित तमाम हिंदू संगठनों के लोग सड़क पर उतर आए। विहिप के लोगों ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का पुतला भी फूंका। पुलिस के आला अधिकारी इस घटना को महज एक इत्तेफाक मान रहे हैं।
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पुलिस लाइन में यमुनापार की पुलिस के लिए दंगा नियंत्रण की रिहर्सल का आयोजन किया गया, जिसमें यमुनापार के थानेदार, सीओ और एसपी यमुनापार शामिल हुए। रिहर्सल के दौरान दंगाई की भूमिका में एक पुलिसकर्मी ने हाथ में भगवा झंडा पकड़ रखा था। भीड़ में शामिल यह दंगाई पुलिस वालों को छका रहा था और पुलिस वाले उसे खदेड़ रहे थे।
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रिहर्सल के बाद आयोजन की फोटो सार्वजनिक होते ही बखेड़ा खड़ा हो गया। पूरे मामला राजनीतिक हो गया। भाजपाइयों, विहिप कार्यकर्ताओं सहित अन्य हिंदू संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि पुलिस के आला अधिकारियों ने प्रदेश सरकार को खुश करने के लिए जानबूझकर दंगाई के हाथ में भगवा रंग का झंडा थमाया।
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हालांकि विवाद बढ़ने के बाद इलाहाबाद के एसएसपी केएस इमैनुएल ने कहा कि यह पुलिस की रुटीन प्रैक्टिस का हिस्सा है। रिहर्सल में पुलिसवाले ही दंगाई बने थे। पुलिस कई रंग के झंडों का प्रयोग करती है। यह महज इत्तेफाक था कि रिहर्सल में भगवा रंग के झंडे का प्रयोग हुआ। किसी समुदाय या वर्ग से जुड़े लोगों की भावना को ठेस पहुंचाना हमारा उद्देश्य नहीं था।
वहीं भाजपा सांसद केशव प्रसाद मौर्य ने इस मामले पर कहा कि इस घटना से सपा की हिंदू विरोधी छवि उजागर हुई है। ऐसा लग रहा है कि प्रदेश सरकार की बागडोर अखिलेश नहीं, आजम के हाथ में है। भगवा त्याग का प्रतीक है। इस पूरे प्रकरण के पीछे कौन है, इसकी जांच होनी चाहिए।