महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन के बीच एक बार फिर से ठाकरे भाई साथ नजर आए। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे के एक मंच पर आने के साथ ही सियासी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
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तस्वीरें: फिर साथ आए ठाकरे भाई, आखिर क्या है माजरा?
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दरअसल, बाल ठाकरे की दूसरी पुण्यतिथि के मौके पर सोमवार को ठाकरे बंधु साथ दिखाई दिए। वैसे भी भाजपा से गठबंधन टूटने के बाद से शिवसेना और मनसे की बीच की दूरियां घटी हैं।
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उधर, स्व. ठाकरे को श्रद्धांजलि देने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी अपने मंत्रियों और पदाधिकारियों के साथ पहुंचे थे, लेकिन शिवसैनिकों ने हूटिंग कर उन्हें दो मिनट में ही लौटने पर मजबूर कर दिया। बहरहाल, फडणवीस लौटते वक्त बाला साहेब की याद में ठाकरे स्मारक बनाने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित करने का ऐलान कर गए।
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उद्धव ठाकरे सोमवार सुबह ही सपरिवार शिवाजी पार्क पहुंच गए थे। पार्क में शिवसैनिक भी बड़ी संख्या में एकत्र हुए थे। दोपहर करीब सवा एक बजे राज ठाकरे भी शिवाजी पार्क पहुंचे। उन्होंने स्व. ठाकरे को श्रद्धांजलि दी और शिवसेना नेताओं से मिलने के बाद उद्धव ठाकरे के पास जाकर बैठ गए।
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बाल ठाकरे को श्रद्धांजलि देने के लिए उद्धव ठाकरे के साथ उनकी पत्नी भी साथ थी। उन्होंने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
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स्मृति स्थल के करीब बने शामियाने में उद्धव और राज ठाकरे करीब 15 से 20 मिनट तक साथ रहे और खुलकर बातचीत की। सूत्रों का दावा है कि भाजपा से दोस्ती टूटने के बाद उद्धव खुद राज से नजदीकी बढ़ाना चाहते हैं। इसीलिए वह राज ठाकरे की बेटी के एक्सीडेंट के बाद उसे देखने अस्पताल पहुंचे थे।
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शिवाजी पार्क में बाल ठाकरे की याद में स्मारक बनाने की मांग को पृथ्वीराज चव्हाण सरकार ने ठुकरा दिया था, लेकिन राज्य की नई सरकार ने इस मामले में सकारात्मक रुख अपनाया है। हालांकि शिवसेना और भाजपा की दोस्ती टूट चुकी है, लेकिन दोनों पार्टियों की दोस्ती की नींव रखने वाले बाला साहेब के प्रति प्रदेश के मुख्यमंत्री ने पूरी श्रद्धा दिखाई है।
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बाला साहेब की पहली पुण्यतिथि पर राज ठाकरे उन्हें श्रद्धांजलि देने नहीं पहुंचे थे। तब राज ने कहा था कि हमें ठाकरे के नाम पर राजनीतिक लाभ नहीं लेना है। उन्होंने उद्धव को निशाना बनाते हुए कहा था कि जिन्हें बाला साहेब के नाम का राजनीतिक फायदा लेना है वो लें।