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सुनामी जिसने पूरे द्वीप को चपेट में ले लिया

Sun, 11 Oct 2015 08:02 PM IST
मेलिसा होगनबूम
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करीब 73 हजार साल पहले, अटलांटिक महासागर समुद्र में स्थित फोगो प्रायद्वीप के पिको डू फोगो ज्वालामुखी में भयंकर विस्फोट हुआ। यह प्रायद्वीप केप वेर्डे द्वीप समूह में स्थित है। यह द्वीप समूह अफ्रीका के उत्तर-पश्चिमी तट पर मौजूद है। इस ज्वालामुखी में हुआ विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि इससे करीब 240 मीटर की ऊंचाई वाली सुनामी की लहरें उठीं और इन लहरों ने करीब 34 मील दूर स्थित सैंटियागो द्वीप को अपने चपेट में ले लिया।लेकिन उस दौर में सैंटियागो द्वीप समूह पर जीवों का अस्तित्व नहीं था, वरना किसी का अस्तित्व नहीं बचता।
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केप वेर्डे द्वीप समूह में 1400 ई। तक आबादी का वास नहीं था। वैसे पिको डू फोगो आज भी सक्रिय है और
प्रत्येक 20 साल पर इसमें विस्फोट भी होता है। हालांकि 73 हजार साल पहले वाला विस्फोट दोबारा नहीं हुआ है लेकिन अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक ऐसा भविष्य में कभी भी हो सकता है। ब्रिटेन के ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के रिकार्डो रामालहो ने केप वेर्डे द्वीप समूह के बारे में अध्ययन करना शुरू किया। इस दौरान उनका ध्यान सैंटियागो द्वीप पर मौजूद विचित्र पत्थरों पर भी गया।वे जितना देखते गए, उतना ही और ज्यादा तलाशते भी गए।
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उन्होंने 40 से ज्यादा ऐसे पत्थर तलाश लिए, इनमें से कुछ का वजन तो 700 टन से भी ज्यादा है। ये बड़े बड़े चट्टानी पत्थर सैंटियोगो द्वीप पर मौजूद दूसरे ज्वालामुखीय चट्टानों से अलग नजर आ रहे थे। रामालहो ने पाया कि इन पत्थरों की चट्टानें काफी हद तक फोगो द्वीप की की चट्टानों से मिल रही है। हालांकि फोगो द्वीप पर मौजूद समुद्र तट की चट्टानें समुद्र तल से नीचे थीं तो रामालहो ने पहले अनुमान लगाया कि सुनामी बहुत बड़ी नहीं रही होगी। लेकिन उनके ताजा अध्ययन ये बताता कि सुनामी बहुत बड़ी थी।

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उनके अनुमान के मुताबिक ये पत्थर समुद्र तल से 220 मीटर ऊंचे हैं।रामालहो के मुताबिक इससे यह जाहिर होता है कि पिको डू फोगो के विस्फोट से जो सुनामी उत्पन्न हुई वह इतनी विशाल रही होगी कि वह इन चट्टानों को सैंटियागो द्वीप तक पहुंचाने में कामयाब रही होगी। रामालहो बताते हैं, "सुनामी ऐसा नहीं था कि जिससे लावा केवल इन पत्थरों तक नहीं पहुंचा होगा, बल्कि तेज बाढ़ जैसा रहा होगा जिससे बहकर चट्टान ऊपर तक पहुंचा होगा।"रामालहो और उनके सहयोगियों ने सुनामी कब हुआ, इसकी पड़ताल की और पाया कि ऐसा करीब 73 हजार साल पहले हुआ होगा। उनका यह अध्ययन जर्नल साइंस एडवांसेज में प्रकाशित हुआ है। इसके अलावा इस शोध दल ने ये भी पाया है कि इन द्वीप समूह में ऐसे विशाल ज्वालामुखीय विस्फोट कभी भी हो सकते हैं।
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रामालहो के मुताबिक ज्वालामुखी में बड़े विस्फोट से ऐसे सुनामी फिर से हो सकते हैं, क्योंकि ऐसा पहले भी हो चुका है। रामालहो कहते हैं, "ऐसी स्थिति आने पर हमारा अस्तित्व कैसे बचे, इस दिशा में हमें सोचना शुरू कर देना चाहिए।"ब्रिटेन के ही यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के बिल मैकग्यूरे कहते हैं कि इस तरह की मेगा सुनामी हर दस हजार साल में एक बार हो सकती है, हालांकि बिल इस अध्ययन दल में शामिल नहीं हैं।
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