देश के लिए महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करने और कानून बनाने वाली संसद की प्रकृति गंभीर है। लेकिन यहां हास-परिहास का भी खूबसूरत दौर चलता है। यह दौर इसलिए यादगार बन जाता है, क्योंकि गंभीर विषयों पर भी सत्तापक्ष और प्रतिपक्ष शेरो-शायरी की शक्ल में एक-दूसरे पर निशाना साधते हैं। 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस शेर पर कि, 'हमें है उनसे वफा की उम्मीद, जो नहीं जानते वफा क्या है।' इस पर तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने यह शेर पढ़ा था कि, 'कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, यूं ही कोई बेवफा नहीं होता।’
इसी तरह जुलाई 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे गंभीर व्यक्ति ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा था, 'न मांझी, न रहबर, न हक में हवाएं हैं, कश्ती भी जर्जर, ये कैसा सफर है।' वैसे भी बशीर भद्र का शेर कि 'दुश्मनी जमकर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे, जब कभी हम दोस्त हो जायें तो शर्मिन्दा न हों', तो संसद का पसंदीदा और चर्चित शेर हो गया है। आज हम ऐसे ही कुछ शेर-ओ-शायरी के साथ संसद के शायराना सफर को आपके समक्ष रख रहे हैं:
संसद का शायराना सफर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
संसद का शायराना सफर
- फोटो : Amar Ujala
संसद का शायराना सफर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
2018 अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शायरी के माध्यम से जवाब देते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ना मांझी ना रहबर, ना हक में हवाएं, है कश्ती भी जर्जर ये कैसा सफर है।
फरवरी 2019 में संसद में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक कविता सुनाई थी। उसके उत्तर में प्रधानमंत्री मोदी ने भी कविता में जवाब दिया था। सदन में दोनों ही कविताओं पर जमकर मेज थपथपाई गई थी।
हुआ यूं था कि लोकसभा में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में करते हुए कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था, राष्ट्रपति के अभिभाषण में वर्तमान सरकार और पिछली सरकार से तुलना करने की कोशिश की गई है जबकि कांग्रेस सरकार के 60 साल के कार्यकाल में कुछ भी काम नहीं होने का आरोप लगाकर देश के प्रधानमंत्री हमारी नयी पीढ़ी को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही यह भी दावा किया कि छह दशकों के सफर में अगर प्रकाश डालें तो "जमीन से लेकर आसमान तक, सड़क से लेकर रेल तक, दूध से लेकर अनाज तक, पानी से लेकर शिक्षा तक, टैंक से लेकर लड़ाकू विमान तक सभी जगह पर ‘कांग्रेस ही कांग्रेस' दिखेगी।"
संसद का शायराना सफर :मल्लिकार्जुन खड़गे
संसद का शायराना सफर
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संसद का शायराना सफर :मल्लिकार्जुन खड़गे
अपने भाषण के दौरान ही मल्लिकार्जुन खड़गे ने कर्नाटक के समाज सुधारक वासवन्ना की एक कविता के माध्यम से पीएम मोदी पर निशाना साधा था। उन्होंने कविता की पंक्तियां सुनाते हुए कहा, 'हुस्न-ओ-आब तो ठीक है लेकिन गुरूर क्यों तुमको इस पर है', मैंने सूरज को हर शाम इसी आसमान में ढलते देखा है।'
कांग्रेस के पिछले कामों पर सवाल खड़ा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में मल्लिकार्जुन खड़गे को जवाब दिया और यह भी कहा की आखिर खड़गे को कविता में 'हुस्न' वाली बात ही क्यों याद आई और इस कविता की आगे की पंक्तियां क्यों नहीं याद आई? फिर पीएम मोदी ने भी उस कविता के आगे अंश को पढ़कर जवाब दिया:
"जब कभी झूठ की बस्ती में सच को तड़पते देखा है?
तब मैंने अपने भीतर किसी बच्चे को सिसकते देखा है?
अपने घर की चारदिवारी में अब लिहाफ में भी सिहरन होती है
जिस दिन से किसी को गुरबत में सड़कों पर ठिठुरते देखा है"
हिंदी के मशहूर कवि सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की एक कविता का अंश अपने भाषण के आखिरी में पीएम मोदी ने पढ़ा जो कुछ इस तरह से था:
"सूरज जायेगा भी तो कहां, उसे यहीं रहना होगा
यहीं हमारी सांसों में, हमारी रगों में,
हमारे संकल्पों में, हमारे रतजगों में
तुम उदास मत होओ,
अब मैं किसी भी सूरज को नहीं डूबने दूंगा"
सदन में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बशीर बद्र के शायरी के माध्यम से अपनी बात कही और वो शेर था,
'दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुँजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जायें तो शर्मिन्दा न हों'
इस पर जवाबी उत्तर देते हुए प्रधामंत्री मोदी ने कहा कि "काश ! बशीर साहब का जो शेर पढ़ा गया, उस शेर के पहले वाली लाइन को भी पढ़ लिया गया होता। इसके बाद प्रधानमंत्री ने बशीर साहब के उस शेर को पढ़ा,
'जी बहुत चाहता है सच बोलें
क्या करें हौसला नहीं होता'
2018 लोकसभा में मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो रही थी उस पर पीएम मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा 'न मांझी, न रहबर, न हक में हवाएं हैं, कश्ती भी जर्जर, ये कैसा सफर है'।
संसद का शायराना सफर: असदुद्दीन ओवैसी
संसद का शायराना सफर
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संसद का शायराना सफर :असदुद्दीन ओवैसी
इसके जवाब में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने संसद में पाकिस्तान के मशहूर शायर हबीब जालिब का शेर पढ़ते हुए मोदी सरकार पर निशाना साधा और कुछ इस अंदाज में अपनी बात रखी:
'फूल शाखों पे खिलने लगे तुम कहो,
जाम रिन्दों को मिलने लगे तुम कहो,
चाक दामन के सिलने लगे तुम कहो,
इस खुले झूठ को, ज़हन की लूट को,
मैं नहीं मानता मैं नहीं जानता।'
संसद का शायराना सफर :भगवंत मान
संसद का शायराना सफर :भगवंत मान
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भगवंत मान ने शायराना अदाज में सरकार की खामियां गिनाई
संसद में आप सांसद भगवंत मान ने मोदी सरकार की कमियां गिनाते हुए पीएम मोदी से पूछा कि,
'बात चली थी भारत को डिजिटल इंडिया बनाने की, बात चली थी भारत के एक सिर के बदले दस सिर लाने की, लेकिन कुछ नहीं आया। मोदी जी कृपया जाते-जाते बता दीजिए अच्छे दिन कब आने वाले हैं?'
संसद का शायराना सफर : मनमोहन सिंह
संसद का शायराना सफर
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मनमोहन सिंह ने जब सुना दिया शेर
सुषमा स्वराज का अंदाज ही अलग था। वो कड़वी से कड़वी बात भी सहजता के साथ बोलती थीं कि विपक्ष समझ भी जाए और उनकी बात भी पूरी हो जाए। 2013 का समय था जब सुषमा स्वराज विपक्ष की नेता थी, तत्कालीन प्रधानमंत्री ने एक शेर सदन में पढ़ा था:
"हमे हैं उनसे वफा की उम्मीद, जो नहीं जानते वफा क्या हैं "
संसद का शायराना सफर: सुषमा स्वराज
संसद का शायराना सफर
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जब सुषमा स्वराज के शेर पर मुस्कुरा गए मनमोहन सिंह
इसका जवाब सुषमा स्वराज ने अपने अंदाज में दो शेर पढ़कर दिया:
"कुछ तो मजबूरियां रही होंगी यूं ही कोई बेवफा नहीं होता "
और दूसरा शेर भी ये पढ़ा,
तुम्हें वफा याद नहीं, हमें जफा याद नहीं,
जिंदगी और मौत के दो ही तराने हैं, एक तुम्हे याद नहीं एक हमे याद नहीं "
संसद का शायराना सफर:अरुण जेटली
संसद का शायराना सफर
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पूर्व वित्त मंत्री स्वर्गीय अरुण जेटली ने अपने कार्यकाल के दौरान बहुत बार शायराना अंदाज में अपनी बात सदन में रखी, एक बार 2017 में केंद्रीय बजट पेश के दौरान उन्होंने अपने सम्बोधन में कुछ शायरी भी पढ़ दीं। कुछ ऐसा था उनका अंदाज-ए -शायरी:
"इस मोड़ पर घबरा कर न थम जाइए आप
जो बात नई है उसे अपनाइए आप
डरते हैं नई राह पे क्यूं चलने से
हम आगे आगे चलते हैं आइए आप
नई दुनिया है नए दौर हैं नई है उमंग
कुछ हैं पहले के तरीके
तो कुछ हैं आज के रंग ढंग
रौशनी आके अंधेरों से जो टकराई है
काले धन को भी बदलना पड़ा अपना रंग"
संसद का शायराना सफर :रामदास आठवले
संसद का शायराना सफर
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रामदास आठवले का अंदाज
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) के प्रमुख रामदास आठवले ने भाजपा सांसद ओपी बिरला को लोकसभा अध्यक्ष पद संभालने पर अपने चिर-परिचित कवि वाले अंदाज में कविता के माध्यम से बधाई दी थी। उसे सुनकर संसद में जमकर ठहाके लगे थे। उनकी कविता को सुनकर सदन में मौजूद हर सांसद ठहाके लगाने लगे थे। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को बधाई देते हुए रामदास आठवले ने कहा था:
'एक देश का नाम है रोम, लेकिन लोकसभा के अध्यक्ष बन गए हैं बिरला ओम,
लोकसभा का आपको अच्छी तरह से चलाना है काम,
वेल में आने वालों का ब्लैकलिस्ट में डालना है नाम-नरेंद्र मोदीजी और आपका दिल है विशाल,
राहुलजी आप रहो खुशहाल. हम सब मिलकर हाथ में लेते हैं एकता की मशाल,
और भारत को बनाते हैं और भी विशाल|
आपका राज्य है राजस्थान, लेकिन लोकसभा की आप बन गए हैं शान,
भारत की हमें बढ़ानी है शान, लोकसभा चलाने के लिए आप हैं पर्फेक्ट इंसान'
संसद का शायराना सफर: ममता बनर्जी
संसद का शायराना सफर
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2010- 2011 के रेल बजट के दौरान ममता बनर्जी ने अपने भाषण में शेर पढ़ डाला, जिसकी पंक्तिया कुछ इस प्रकार थी:
"हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम,
वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा भी नहीं होती "
अकबर इलाहबादी
संसद का शायराना सफर :पी चिदंबरम
संसद का शायराना सफर
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2013-2014 के बजट के दौरान उन्होंने अपनी बात एक स्थानीय बात के साथ रखी:
"कलंगथू कंदा वेक्कन, थुलंगकथू थूक्कग कदीनथू सेयल "
तिरुवल्लुवर
(एक आदमी के पास साफ साफ और सही तरीके से देखने वाली आंखें, मजबूत इच्छा शक्ति और चौकस दिमाग होना चाहिए )
संसद का शायराना सफर :राजनाथ सिंह
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केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बार सदन में अपनी बात रखने के लिए एक शेर अपने आजाद में पढ़ा, उन्होंने कहा:
“मेरी हिम्मत को सराहो, मेरे हमराही बनों मैंने एक शम्मा जलाई है..”
( जब ये शेर पढ़ा था तब राजनाथ सिंह गृह मंत्री थे )
उस समय विपक्ष की ओर से कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार को आगाह करते हुए मशहूर शायर मुनव्वर राणा का शेर पढ़ा था:
“एक आंसू भी हुकुमत के लिए खतरा है, तुमने देखा नहीं आंखों का समंदर होना”
संसद का शायराना सफर :टीएमसी सांसद दिनेश त्रिवेदी
संसद का शायराना सफर
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सदन में टीएमसी सांसद दिनेश त्रिवेदी का शायराना अंदाज
एक बार सदन में तृणमूल कांग्रेस सांसद दिनेश त्रिवेदी ने एक शेर पढ़ा था:
“जिंदगी से बड़ी कोई सजा नहीं और क्या जुल्म है ये पता ही नहीं,
इतने हिस्सों में बंट गया हूं मैं, मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं,
ए जिंदगी बता कहां जाएं, बाजार में जहर मिलता नहीं,
लोग टूट जाते हैं एक छोटा सा घर बनाने में,
तुम तरस नहीं करते हो बस्तियां जलाने में”
इस मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सांसद तारिक अनवर भी पीछे नहीं रहे, उन्होंने भी अपना शायरी का हुनर सदाम में दिखाया। एक मौके पर एनसीपी सांसद तारिक अनवर ने कहा था:
“बड़ा शोर सुनते थे पहलू में दिल का जो चीरा तो इक क़तरा-ए-खूं न निकला...”