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नमक में पेशाब मिलने का डर, सोनम ने खोजा हल, देखें तस्वीरें

Thu, 17 Sep 2015 08:57 AM IST
मधु पाल, मुंबई से/बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
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नमक बनाने का तरीका वैसे तो ज्यादा मुश्किल नहीं है क्योंकि ये प्राकृतिक रुप में मिल जाता है लेकिन इसे छानने और सुखाने के लिए कडी मेहनत करनी पडती है। खुले मैदान में, तपते सूरज में नमक छानते मजदूरों को मेहनत और गर्मी के कारण प्यास तो लगती है लेकिन वो ज्यादा पानी नहीं पीते। पानी न पीने की वजह थोडी अमानवीय लग सकती है क्योंकि नमक बनाने का काम करने वाले यह मजदूर पेशाब करने के लिए नहीं जाना चाहते।
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नमक में पेशाब मिलने का डर, सोनम ने खोजा हल, देखें तस्वीरें

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तमिलनाडु के वेदरनयम गांव में नमक बनाने वाले मजदूरों को आठ से नौ घंटे की मजदूरी के दौरान पेशाब करने की इजाजत नहीं मिलती क्योंकि पेशाब के नमक में मिल जाने का खतरा रहता है।जरूरत पडने पर मजदूरों को तीन से चार किलोमीटर दूर जाना पडता है, जो पुरुषों के लिए तो कठिन है ही, महिलाओं के लिए तो लगभग असंभव हो जाता है।
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नमक की मजदूरी करने वाली शकुंतला का कहना है,"यहाँ पर कई मर्द भी काम करते है। मर्द 3 किलोमीटर चलकर खुले में पेशाब कर लेते हैं लेकिन हम औरतों के लिए खुले में पेशाब करना मुश्किल हैं।"वो बताती हैं, "हममें से अधिकतर 10 घंटे तक पेशाब रोके रहती हैं और फिर घर पहुँचने के बाद ही पेशाब कर पातीं हैं।"

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पाबंदी के चलते कामगार पानी नहीं पीते या कम पीते हैं, जिसकी वजह से वो किडनी, गुर्दे और खून संबंधी रोगों से पीडित हो जाते हैं। लेकिन मुंबई की 24 वर्षीया सोनम दुम्ब्रे ने इन मजदूरों के लिए इस समस्या का इलाज ढूंढ लिया जिसका नाम है 'जीरो लिक्विड डिस्चार्ज यूरिनल'।
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पर्यावरण विज्ञान की छात्रा की खोज से करीब 120 एकड में फैले वेदरनयम नमक क्षेत्र के मजदूर किसी भी समय पेशाब के लिए जा सकते हैं।सोनम कहती हैं, "नमक बनाने वाले मजदूर लगभग 50 डिग्री तापमान में घंटो काम करते हैं, लेकिन पेशाब न लगे, इसलिए पानी नहीं पीते हैं।"वो बताती हैं,"इसके चलते उन्हें त्वचा, लीवर और किडनी संबंधी बीमारियां हो जाती हैं लेकिन मजबूरी के चलते वो पानी से दूर ही रहते हैं।"
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ऐसे में पेशाब में मौजूद यूरिया से इसे कोई नुकसान नहीं पहुंचता और पौधों के बडे होने पर उन्हें काट कर जानवरों के लिए भूसे के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस अनोखे शौचालय के यहां आ जाने से मजदूरों और खासतौर पर महिला मजदूरों को राहत मिली है।
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फिलहाल अपनी तरह का यह अकेला ही पेशाबघर है और सोनम की कोशिश है कि सरकारी सहायता से ऐसे शौचालय देशभर में नमक की खेती करने वाले राज्यों में लगाएं जाएं।
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