मेरठ में सूरजकुंड स्थित बाल संप्रेक्षण किशोर गृह में शुक्रवार दोपहर किशोरों ने जमकर बवाल काटा। मारपीट, तोड़फोड़ कर किशोरों ने फाइलों में आग लगा दी। सीओ सिविल लाइन और तीन थानेदारों को बंधक बनाकर पीट दिया। हालात ऐसे बिगड़े कि अधिकारियों को जान बचाकर भागना पड़ा।
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बच्चा जेल में किशोरों का बवाल, थानेदारों को पीटा
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खाना, पानी और बिजली की समस्या से परेशान किशोरों ने संप्रेक्षण गृह ब्रेक
करने का प्रयास किया। आरएएफ ने ग्रेनाइट गोले से धमाके कर किशोरों पर
लाठीचार्ज किया, तब जाकर स्थिति नियंत्रित हुई।
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संप्रेक्षण गृह में मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर और बागपत के 170 किशोर हैं। शुक्रवार दोपहर संप्रेक्षण गृह में जुवेनाइल कोर्ट के लिए वकीलों की अदालत लगी थी। इस दौरान कोर्ट की मेंबर शोभा सक्सेना, आशा तोमर और अन्य स्टाफ कर्मियों से किशोरों ने अभद्रता शुरू कर दी।
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खाना, पानी और बिजली की शिकायत कर किशोरों ने उत्पात शुरू कर दिया। किशोरों ने कर्मचारियों से मारपीट और तोड़फोड़ कर सरकारी फाइलों में आग लगा दी। जैसे-तैसे कर वकील और कर्मचारी जान बचाकर बाहर भागे और पुलिस कंट्रोल को सूचना दी।
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एसओ नौचंदी विनोद कुमार पांच पुलिसकर्मियों के साथ पहुंचे तो किशोरों ने उन्हें बंधक बनाकर पीट दिया। इसके बाद इंस्पेक्टर सिविल लाइन आलोक सिंह, एसओ मेडिकल संजीव कुमार और सीओ सिविल लाइन शिवराज सिंह पहुंचे। किशोरों ने उन्हें भी बंधक बनाकर हमला बोल दिया।
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पुलिसकर्मियों को पीटते-पीटते किशोर बाहर तक आ गए। हालात इस कदर बेकाबू हुए कि पुलिस कुछ समझ ही नहीं पाई। एसएसपी ओंकार सिंह, एसपी सिटी ओमप्रकाश, एडीएम सिटी और पुलिस फोर्स संप्रेक्षण गृह पहुंच गई।
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भारी पुलिस फोर्स देखकर किशोरों ने लोहे का दरवाजा अंदर से बंद कर खिड़कियों से शीशे और पत्थर फेंके। इसमें 18 पुलिसकर्मी घायल हो गए। एसएसपी, एसपी ने माइक लेकर किशोरों को समझाया लेकिन वे अपनी हरकतों से बाज नहीं आए।
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करीब तीन घंटे बाद आरएएफ की दो कंपनी बुलाई गई। आरएएफ ने स्मोक टिअर ग्रेनेड छोड़े और किशोरों पर लाठीचार्ज किया। इसके बाद स्थिति कुछ नियंत्रण में आई। देर शाम तक किशोर हल्ला मचाते रहे, पुलिस तैनात रही।
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एसएसपी ओंकार सिंह ने बताया कि किशोरों ने पुलिस से मारपीट और पथराव किया है। मामले में जांच बैठा दी गई है। किशोरों के खिलाफ नौचंदी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। मामले की एक रिपोर्ट प्रशासनिक अफसरों को दी गई, जिसे लखनऊ भेजा जाएगा।
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पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने किशोरों को शांत होने को कहा। इस पर किशोरों ने चेतावनी दी कि जब तक खाना, पानी और बिजली की व्यवस्था दुरुस्त नहीं होगी, तब तक बवाल करेंगे। पानी और बिजली न मिलने के कारण 70 बच्चों को बीमार होना बताया।
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करीब पांच घंटे तक पुलिस नीचे से और किशोर खिड़की से वार्ता करते रहे। किशोर अधिकारियों को गाली देते तो कभी 24 घंटे में व्यवस्था ठीक न करने पर संप्रेक्षण गृह को आग के हवाले करने की धमकी देते।
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राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर) में बवाल काटने वाले सिर्फ कागजों में नाबालिग हैं। इनकी संख्या करीब 38 है। प्रशासन को भी यह मालूम है कि इनकी उम्र 18 साल से ज्यादा है लेकिन बाल संरक्षण के नियमों की वजह से जिला जेल में स्थानांतरित नहीं किया जा रहा है।
पुलिस अधिकारी किशोरों को समझाने में लगे थे और वह सिगरेट से धुआं उड़ा रहे थे। संप्रेक्षण गृह में सिगरेट किसने पहुंचाई, इसकी जांच शुरू हो गई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक संप्रेक्षण गृह में नशीले पदार्थ का सेवन करने वाले किशोरों की संख्या बढ़ती जा रही है।