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23 साल बाद फिर हरे हुए जख्म

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21 मई 1991, इसी मनहूस तारीख को तमिलनाडु में चेन्नई के पास श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी रैली के दौरान आत्मघाती धमाका हुआ था।
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इसी आत्मघाती धमाके में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी समेत 13 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
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राजीव गांधी की हत्या के समय राहुल गांधी महज 21 साल के थे।

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इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सांतन, मुरुगन, पेरारिवलन और नलिनी को मौत की सजा सुनाई थी। सोनिया गांधी की अपील के बाद नलिनी की फांसी को आजीवन कारावास में बदल दिया गया। (फोटो: अमित गुप्ता)
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बाद में सुप्रीम कोर्ट ने राजीव गांधी हत्याकांड में तीन लोगों को दी गई फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया। (फोटो: अमित गुप्ता)
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अदालत ने दया याचिका की सुनवाई में देरी को वजह बताकर सजा में राहत देने का फैसला किया। (फोटो: अमित गुप्ता)
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फैसले के एक दिन बाद ही जयललिता सरकार ने इन हत्यारों को जेल से रिहाई के लिए केंद्र सरकार से सिफारिश कर डाली। (फोटो: अमित गुप्ता)

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शुरुआत से ही इस मामले में खूब सियासी चालें देखने को मिली। एमडीएमके चीफ वाइको और वकील राम जेठमलानी अदालती फैसले के बाद अपनी खुशी छिपा नहीं सके।

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मदुरैई में तो वकीलों ने दोषियों के दया माफी को लेकर अनूठे अंदाज में अपना विरोध जताया।

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हालांकि राहुल गांधी ने कोर्ट के फैसले पर अपनी निराशा जताई थी। उनका कहना था कि जब एक प्रधानमंत्री को इंसाफ नहीं मिला तो फिर आम आदमी को कैसे मिलेगा।
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इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की अर्जी पर सुनवाई करते हुए सातों ‌अभियुक्‍तों की रिहाई पर रोक लगा दी।
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