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मिलिए समोसा बॉय से ये बताएगा आप को कुछ खास।

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जलेबी, गुलाब जामुन और रसगुल्ला....ये मिठाइयां मुंह में पानी लाने के लिए काफ़ी हैं। पर क्या आपने कभी ये सोचा है कि ये किसी युवती को छेड़खानी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए या किसी बाल मजदूर को शोषण के विरुद्ध लड़ने के लिए प्रेरित भी कर सकते हैं?
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या ऐसा भी हो तो हो सकता है कि पेट भरने की ये चीजें किसी कलाकार को चित्र उकेरने या कार्टून बनाने के लिए प्रेरित करें?
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दिल्ली के चित्रकार राजकमल आईच देश की आम जनता के नाश्ते की चीजों को सुपर हीरो से कम नहीं मानते। बीबीसी को उन्होंने बताया कि हर राज्य के खान पान की अपनी अपनी खूबियां हैं, पर वे उन कुछ चीजों में हैं जो देश को जोड़ती हैं।

वे कहते हैं, 'रसगुल्ला बंगाल की अद्भुत देन है, पर उसे पूर देश में पसंद किया जाता है। ढोकला गुजरात का है, पर दूसरे राज्यों के लोग भी वो खाते हैं।'

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आईच का मानना है कि ये चीजें सर्वहारा के संघर्ष की प्रतीक हैं, ग़रीबों को बल देने का काम करती हैं।

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उनके मुताबिक़, समोसा किसी बाल मज़दूर के लिए ज़बरदस्त चीज हैं क्योंकि वो चाहे तो दिन में दस समोसे खा सकता है। आईच को जलेबी का चित्र बनाने की प्रेरणा कॉलेज की छात्रा से मिलती है, जो छेड़खानी के ख़िलाफ़ एक दिन उठ खड़ी होती है।

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वे "भाजा मुख" यानी भुना हुआ मुंह नाम से कार्टून भी बनाते हैं। एक दूसरे कार्टून "द बेंगाली वैम्पायर" के ज़रिए वे भद्र लोक बंगाली समुदाय और खुद पर व्यंग्य करते हैं।
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