जिस मोनोसोडियम ग्लूटामेट (एमएसजी) के हवाले इन दिनों मैगी को लेकर हंगामा है, वह एमएसजी केवल मैगी में ही नहीं है, दूसरे खाद्य पदार्थों में भी उसका इस्तेमाल होता है, खासकर डब्बाबंद खाद्य पदार्थों में। (रिपोर्ट: राजीव रंजन, अमर उजाला, गोरखपुर)
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मैगी ही नहीं, आपके इन खानों में भी मिला है 'खतरनाक जहर'
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के रसायनशास्त्र के शिक्षक प्रो. निजामुद्दीन का कहना है कि डिब्बाबंद आहार में इसका खूब इस्तेमाल किया जाता है। चाइनीज रेसिपी वाले प्रॉसेस्ड फूड, चिप्स, नमकीन स्नैक्स, डिब्बाबंद जूस, पैक्ड चटनी, मसाला, टोमेटो सॉस आदि में भी मोनोसोडियम ग्लूटामेट होता है।
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अगर आपको लगता है कि ऐसा आहार स्वास्थ्य के लिहाज से हानिकारक हैं, जिनमें एमएसजी होता है तो आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि कई तरह के प्राकृतिक आहार में भी मोनोसोडियम ग्लूटामेट मिलता है। आलू, टमाटर, मशरूम, अंगूर, पनीर आदि में एमएसजी होता है। हालांकि एमएसजी की सीमित मात्रा नुकसानदेह नहीं है, लेकिन अगर यह अधिक मात्रा में लिया जाए तो सेहत के लिए हरगिज ठीक नहीं है।
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सफेद रंग का चमकीला दिखने वाला मोनोसोडियम ग्लूटामेट (अजीनोमोटो) एक सोडियम साल्ट है। अगर आप डिब्बाबंद खाद्य या चाइनीज खाने के शौकीन हैं तो उसमें यह बहुतायत में मिलाया जाता है। यह ऐसा साल्ट है जो खाने का स्वाद नहीं बढ़ाता बल्कि हमारी स्वाद ग्रंथियों की सक्रियता मद्धिम कर देता है। ऐसे में खाने वाले को खाद्य के खराब स्वाद का पता नहीं चलता। दरअसल कई बार इसका प्रयोग खाद्य पदार्थों की घटिया गुणवत्ता को छिपाने के लिए भी किया जाता है।
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बकौल प्रो. निजामुद्दीन, मोनोसोडियम ग्लूटामेट एक गैरजरूरी एमिनो अम्ल है। इसलिए हमारे पाचन तंत्र में इसका जाना कुछ न कुछ नुकसान पहुंचाता है। अगर यही जरूरी एमिनो अम्ल होता तो शरीर के विकास में सहायक साबित होता। शरीर के बेहतर विकास के लिए 20 एमिनो अम्ल जरूरी है, जिनमें से 11 तो मानव शरीर खुद ही बना लेता है। नौ एमिनो अम्ल बाहर से लेने पड़ते हैं, लेकिन इनमें मोनोसोडियम ग्लूटामेट नहीं है।
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सिर्फ दो मिनट में पकने वाली मैगी को सेहत के लिहाज से हानिकारक माना जा रहा है। खाद्य नियामक प्राधिकरण ने मैगी की जांच में पाया कि उसमें एमएसजी की मात्रा तय सीमा से अधिक है। कोलकाता की सेंट्रल फूड लैबोरेट्री की जांच में इसकी मात्रा सामान्य से अधिक पाई गई। इसके अलावा मैगी में प्रति दस लाख 17वां भाग लेड पाया गया है, जबकि यह मात्रा 0.01 तक ही मान्य है।