भारत और पाकिस्तान के रिश्तों की तल्खी सार्क सम्मेलन के मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाक पीएम नवाज शरीफ के व्यवहार में साफ नजर आई।
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तस्वीरें: आखिर क्यों मोदी-नवाज नहीं रच सके इतिहास?
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दोनों नेताओं ने मंच तो साझा किया लेकिन न तो एक दूसरे की तरफ देखा और न ही शिष्टाचार के तहत हाथ मिलाया।
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तीन घंटों तक चले सम्मेलन में शरीफ और मोदी के बीच सिर्फ दो कुर्सियों की दूरी थी लेकिन रिश्तों की दूरी इससे कहीं ज्यादा दिखी। मोदी और शरीफ के बीच नेपाल और मालदीव के नेता बैठे थे।
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उम्मीद तो यह की जा रही थी कि मोदी और शरीफ शिष्टाचार के तौर पर एक दूसरे से मुखातिब होंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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इतना ही नहीं जब शरीफ सम्मेलन को संबोधन के लिए उठे तो मोदी के नजदीक से गुजरे लेकिन दोनों नेताओं ने एक दूसरे की तरफ देखना भी गवारा नहीं किया।
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इससे पहले मंगलवार को शरीफ ने गेंद भारत के पाले में डालते हुए कहा था कि बातचीत रद्द करने का फैसला भारत का था और इसे शुरू करने के लिए भारत को ही पहल करनी चाहिए।
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वहीं भारत का रुख साफ है और उसका कहना है कि वह पाक के साथ अर्थपूर्ण बातचीत चाहता है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने शरीफ के बयान पर कहा कि भारत-पाक रिश्तों में अर्थपूर्ण बातचीत बेहद अहम है।
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक पाकिस्तान पूरे हालात से वाकिफ है और उसे पता है कि भारत जिस अर्थपूर्ण बातचीत पर जोर दे रहा है उसका क्या मतलब है। भारत ने साफ कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाक पीएम नवाज शरीफ के बीच 18वें सार्क सम्मेलन के दौरान मुलाकात की कोई योजना नहीं है।
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भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने दानों नेताओं के बीच मुलाकात पर जारी अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि इस बारे में विदेश मंत्रालय को कोई अनुरोध नही मिला है इसलिए मुलाकात की योजना नहीं है। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी अफगानिस्तान, श्रीलंका, मालदीव, बांग्लादेश और भूटान के प्रमुखों के साथ अहम मुद्दों पर द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
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मुंबई में हुए 26/11 हमले की छठी बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने
ट्वीट कर हमले में मारे गए लोगों और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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इसके अलावा 18वें दक्षेस (सार्क) सम्मेलन में भी पीएम नरेंद्र मोदी ने 2008 के इस हमले को याद करते हुए आतंकवाद से लड़ने का मुद्दा उठाया। साथ ही इसके खिलाफ लड़ने को प्रतिबद्ध होने की बात कही।
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श्रीलंका के राष्ट्रपति महेंद्रा राजपक्षे ने भी आतंकवाद को मौलिक चुनौती करार दिया। उन्होंने कहा कि मई 2009 में श्रीलंका में आतंकवादी समूहों को निष्क्रिय करने से आतंकवाद पर कुछ हद तक देश में लगाम लग पाई है। उन्होंने आतंकवाद को खत्म करने के लिए कदम उठाने की बात कही।
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अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ घनी ने सोमवार को देश में वॉलीबाल मैच के दौरान हुए धमाके का जिक्र करते हुए कुछ देशों पर आतंकवाद को पनाह देने का जिक्र किया। इस पर मोदी ने कहा कि आतंकवाद से लड़ने को मुझे हमारी असीम क्षमताओं में विश्वास है।
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नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला समेत अन्य नेताओं ने जहां आतंकवाद से
निपटने को सामूहिक प्रयासों की मांग की, वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने
आतंकवाद पर चुप्पी साधी।
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पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने विवाद मुक्त दक्षिण एशिया की बात करते हुए कहा कि हमें आपस में लड़ने की बजाय गरीबी और दूसरी सामाजिक समस्याओं से लड़ना चाहिए। 15 मिनट चले शरीफ के भाषण में कहीं भी आतंकवाद का जिक्र नहीं हुआ।
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बुधवार को करीब तीन घंटे तक चले सार्क सम्मेलन के दौरान ‘सार्क कनेक्टिविटी’ (दक्षेस देशों को एक-दूसरे से जोड़ने) की पहल करने वाले भारत को पाकिस्तान के रवैये से निराशा हुई है, जबकि भारत ने दक्षेस देशों के साथ द्विपक्षीय संपर्क की शुरुआत पहले ही कर दी है। नेपाल के साथ मंगलवार को हुआ मोटर वाहन समझौता इसका उदाहरण है।
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प्रधानमंत्री मोदी ने बेहतर संपर्क की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि आम लोगों के आपस में जुड़ने से ही रिश्ते मजबूत होंगे। श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे और बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना भी क्षेत्रीय मोटर वाहन और रेलवे समझौते के पक्ष में हैं।
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जहां इस बार के सार्क सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच रिश्तों की तल्खी के चलते कोई मुलाकात-बात नहीं हुई। वहीं अगर याद करें साल 2002 के सार्क सम्मेलन को तो उस समय काठमांडू में हुए सम्मेलन में पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने खुद उठकर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से हाथ मिलाया था। जबकि दोनों देशों के रिश्तों में उस समय भी तनाव बरकरार था।