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राहत के सुरों से सजी सतरंगी शाम, फिल्मी हस्तियां भी पहुंचीं

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‘यूपी प्रवासी दिवस’ के कार्यक्रम के पहले दिन की शाम पाकिस्तानी सूफी गायक राहत फतेह अली खान से सुरों से सजी। होटल आईटीसी मुगल में कार्यक्रम के लिए विशेष पंडाल बनाया गया। कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पंडाल में पहुंच गए थे। सांसद डिंपल यादव करीब आधे बाद अपनी बेटी के साथ पहुंची। (अमर उजाला ब्यूरो/आगरा)
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रात करीब 8:30 बजे राहत फतेह अली की टीम ने स्टेज संभाली और फिर शुरू हुआ सुरों का ऐसा सिलसिला जो देर तक चलता रहा। राहत फतेह फली खान ने अपनी गायकी की शुरूआत ‘तू न जाने तेरे आसपास है खुदा....’ से की।
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पहली पंक्तियों पर ही पूरा पंडाल तालियों की आवाज से गूंज उठा। इसके बाद उन्होंने ‘कैसा ये इश्क है....’ गाया। इसके बाद उन्होंने सूफी गीत गाया। राहत अली खान ने देर रात तक एक से बढ़कर एक प्रस्तुत दी।

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पाकिस्तान के मशहूर गायक राहत फतेह अली खान ने पठानकोट में हुए आतंकी घटना की मजम्मत की। उन्होंने कहा कि ऐसे नहीं होना चाहिए। भारत और पाकिस्तान के बीच शांति बहाली कोशिशों को उन्होंने सकारात्मक पहल करार दिया। राहत ने कहा कि भारत में पाकिस्तानी कलाकारों को पूरा सम्मान मिलता है। मेरे पार देने के लिए सुर हैं और आज के कार्यक्रम में सुर उड़ेल दूंगा।
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मेहमानों के लिए रात्रि भोज के लिए अलग से विशेष पांडाल बनाया गया था। इसमें आगरा, लखनऊ के व्यंजन विशेष रूप से परोसे गए। आगरा के साथ अवध के व्यंजन परोसे गए। आगरा का स्वाद स्टाल पर आगरा के नाश्ते की मशहूर बेढ़ई, जलेबी परोसी गई। पराठा, मालपुआ और रबड़ी भी थी। पेशावरी और शान-ए-अवध के स्टाल भी लगे थे।
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मशहूर फिल्म निर्माता, निर्देशक और कलाकार संजय खान का कहना है कि एनआरआई दिवस सम्मेलन यूपी के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। वे इस सम्मेलन में अपने अभिनेता पुत्र जायद खान के साथ शिरकत करने आए थे।
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उन्होंने पत्रकारों से कहा कि यूपी में औद्योगिक विकास की भरपूर संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव विकास के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उनकी नीति से यहां फिल्मकारों को बड़ा प्रोत्साहन मिला है। जो एनआरआई आज बीज बोएंगे, वे कल फल खाएंगे।

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दुनिया भर में भारत का नाम रोशन कर रहे 16 एनआरआई की प्रतिभा को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रवासी भारतीय रत्न अवार्ड से नवाजा है। इन्होंने अलग-अलग क्षेत्र में अपने हुनर का लोहा मनवाया है।

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इनमें त्रिनिनाद एंड टोबैगो के प्रधानमंत्री बासदेव पांडेय भी शामिल हैं। उनका जन्म वहीं पर हुआ था, लेकिन उनके पूर्वज यूपी के ही आजमगढ़ के रहने वाले थे।

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इस सूची में पहला नाम है मेरठ में पैदा हुई अलका भटनागर का। यूएसए में रह रहीं सिंगर अलका की आवाज का जादू दुनिया भर में छाया है। इसी तरह हसनपुर (मुरादाबाद) के डा. अटाट खान ने सऊदी अरब के चिकित्सा क्षेत्र में बड़ा नाम कमाया है।

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गोरखपुर के मूल निवासी अशोक रामसरन अमेरिका में ग्लोबल आर्गेनाइजेशन ऑफ प्यूपिल ऑफ इंडिया (जीओपीआईओ) नाम से संगठन चलाते हैं। उन्होंने मानवाधिकारों के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है।

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आजमगढ़ के फ्रैंक एफ, इस्लाम ने गृह जनपद में स्कूल खोला है। प्रतिभावान छात्रों को छात्रवृत्ति भी प्रदान कर रहे हैं। कानपुर से ताल्लुक रखने वाले कंवल रेखी अमेरिका में कई संगठनों में उच्च पदों पर हैं।

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लखनऊ के डा. खालिद हमीद ब्रिटिश प्रशासन में उच्च पदों पर रहे हैं। धार्मिक एकता के लिए उन्होंने जीवन भर काम किया है। इसके लिए उन्हें पद्मश्री और पद्म भूषण से नवाजा जा चुका है।

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मूलरूप से कानपुर के डा. कृष्ण कुमार ने अमेरिका में बाल रोग पर सराहनीय कार्य किया है। अलीगढ़ के नदीम अख्तर तरीन सऊदी अरब में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा काम कर रहे हैं।

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सीतापुर की डा. नंदिनी टंडन को अमेरिका में चिकित्सा क्षेत्र में अहम योगदान दिया है। बस्ती के डा. राजन प्रसाद न्यूजीलैंड की संसद के सदस्य हैं। लखनऊ के प्रोफेसर राजेश चंद्रा ने फिजी में शिक्षा के क्षेत्र में अहम योगदान दिया है। फैजाबाद के डा. राजेंद्र तिवारी नीदरलैंड के कई संस्थानों में उच्च पदों पर रहे हैं।

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लखनऊ के डा. श्रीनाथ सिंह ने अमेरिका में गरीब बच्चों के लिए स्कूल बनाने का काम किया है। कानपुर की सुमन कपूर ने न्यूजीलैंड में शिक्षा और नारी सशक्तीकरण पर काम किया है।
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लखनऊ की तलत एफ हसन अमेरिका की सिलिकॉन वैली में तकनीक संस्थान की स्थापना करने वाली पहली भारतीय अमेरिकी महिला हैं।
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