छावनी के कुलवंत सिंह स्टेडियम में बृहस्पतिवार को दो दिवसीय ‘अपनी सेना को जानिये’ मेला का आयोजन किया गया। उद्घाटन 49 ब्रिगेड कमांडर ब्रिगेडियर एसके सिंह ने किया।चार्जिंग रैम डिविजन की तरफ से आयोजित मेले में स्कूली बच्चों ने सेना की उन बारीकियों को देखा, जिन्हें सभी से दूर रखा जाता है। युद्ध का माहौल, रक्षा उपकरण, सैन्य टैंक, अत्याधुनिक हथियार से लेकर पाक पर जीत की गौरवगाथा की प्रदर्शन लगाई गई। (अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ)
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देश की इस बेटी ने उठा ली बंदूक, बच्चे चढ़ गए सेना के टैंक पर
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सेना अधिकारियों का दावा है कि मेले में पांच हजार से ज्यादा लोग आए हैं। युवाओं को सेना के प्रति प्रेरित करने और राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत करने के उद्देश्य से आयोजित मेले में स्कूली बच्चों ने काफी उत्साह दिखाया। सेना के टैंकों पर बच्चों ने चढ़कर फोटो खिंचवाए। सेना की तरफ से प्रदर्शन के लिए लगाए गए अत्याधुनिक हथियारों और रॉकेट लांचर को भी स्कूली बच्चों ने हाथों में लेकर देखा। इन टैंकों और हथियारों की सेना के जवानों ने बच्चों को विस्तार से जानकारी दी।
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मेले में बच्चों को युद्ध के माहौल से परिचित कराने के लिए भी व्यवस्था की गई थी। जहां युद्ध के दौरान तोपों को तैयार करने का डेमोस्ट्रेशन किया गया। वहीं, खाली मैदान में बंकर बनाकर हथगोलों से हमलाकर करने का माहौल भी बनाया गया। जवानों ने हथियारों से हमला करने का भी डेमोस्ट्रेशन दिया। इस दौरान धुआं फैलाने वाले टैंकों से चारों तरफ धुआं फैलाकर युद्ध का माहौल बनाया गया।
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इसमें टैंक अटेक डेमोस्ट्रेशन और टैंक राइड का भी प्रदर्शन किया। युद्ध के दौरान सेना के टैंक धुआं इसलिए करते हैं ताकि दुश्मन को टैंक और जवानों की सहीं पोजिशन का पता ना लगे। मेले में आर्मी के घोड़ों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। रेसलदार दिनेश कुमार, लायंस टी विश्वनाथ, सवार शौर्य प्रताप, अमन, सौरभ ने अपने घोड़ों से प्रदर्शन कर सभी की तालियां बटोरी। उन्होंने कई तरह से जंप लगाए।
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मेले में कार्यक्रम के दौरान जैसे ही डॉग शो का आरंभ हुआ, तो सभी ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। आर्मी के छह डाग ने करतब दिखाकर सभी का मन जीत लिया। टीम कमांडर नायब रेसलदार डीके यादव ने पूरी टीम के साथ कई करतबों का प्रदर्शन किया। डॉग चीकू, मेट्रो, ग्रोवर, पंजर, देव, डूम ने सभी को झुककर सेल्यूट किया।
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इसके बाद उन्होंने आग के बीच जंप कर खूब तालियां बटोरी। डॉग्स द्वारा माइंड डिटेक्ट का भी प्रदर्शन किया गया। मेले में पाइप बैंड ने विभिन्न धुनों का डिस्प्ले किया। इसमें युद्ध की तैयारी, युद्ध शुरू करने से लेकर जीत की खुशी मनाने तक की धुनों का प्रदर्शन किया।
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मेले में 17 पुणे हॉर्स के इतिहास को प्रदर्शित किया गया। इसमें ब्रिटिश हुकूमत के शासनकाल के दौरान 17 पुणे हॉर्स को पर्सिया में 1857 में जीती जंग के बाद मिले फख्र-ए-हिंद के खिताब, 1965 भारत-पाक युद्ध के दौरान फुलोर के गेट पर लगा पत्थर, पाकिस्तान से कब्जाए हथियार, फोन, दस्तावेज, मैप समेत कई चीजें की प्रदर्शनी लगाई गई।
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इसके अलावा कारगिल युद्ध के बाद मिले 17 जाट की शान ‘बैटल ऑनर कारगिल’ का भी डिस्प्ले किया गया है। युद्ध के दौरान शहीद हुए जवानों के भी फोटो लगाए गए हैं। मेले में 23 पंजाब बटालियन ने प्रदर्शनी लगाई। इसमें सन 1965, 1971 और कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान जवानों से कब्जाएं हथियार और दस्तावेजों को डिस्प्ले किया गया है। इसमें बटालियन को मिले पदकों और जवानों की भी पूरी डिटेल दी गई है।
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मेले में थल सेना भर्ती कार्यालय मेरठ की तरफ से स्टॉल गाया गया। इसमें सेना में भर्ती का तरीका बताया गया। इसके अलावा सेना में भर्ती होने के फायदे और उसके तरीके पर बारीकी से जानकारी दी गई।
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सेना के मेले को देखने के लिए स्कूलों ने भी बढ़चढ़कर प्रतिभाग किया। इसमें एमपीएस गर्ल्स एंड ब्वायज, इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल, ट्रांसलेम एकेडमी, सेंट जोंस पब्लिक स्कूल, केंद्रीय विद्यालय सिख लाइन, एमआईईटी, होटल मैनेजमेंट एकेडमी के अलावा विभिन्न स्कूलों के छात्रों ने सेना को नजदीक से देखा।
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इस मेले में एमएजी एंड एजीएल, रॉकेट लांचर, लाइट मशीन गन, 81 एमएम मोर्टार, एंट्री टैंक मिसाइल लांचर, टैंक टी 72, टैंक, आर्टिलरी गन, शिल्का, एंटी एयरक्राफ्ट गन आदि का डिस्प्ले किया गया।
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मेले में सेना ने विभिन्न आधुनिक हथियार और टैंक लगाए हैं। जो मेरठ छावनी में ही मौजूद हैं। इसमें एक टैंक ऐसा है, जो उड़ीसा के गोपालपुर से लाया गया है। आर्मी की एंट्री एयर क्राफ्ट गन (शिल्का) रूस में बनी है। इसमें रेडार जहां 20 किलो मीटर दूर तक दुश्मन के फाइटर का पता लगाता है, वहीं कंप्यूटर से ऑटोमेटिक काम करने वाली गन रेडार की मद्द से दुश्मन को टारगेट करती है। यह गन एक मिनट में 6 हजार राउंड फायर करती है।