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15 सेकेंड में शोला बना सात जवानों का 'खूनी' हेलिकॉप्टर

Sat, 20 Sep 2014 01:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद
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सीतापुर में 25 जुलाई को दुर्घटनाग्रस्त हुआ त्रिशूल एयरफोर्स स्टेशन का ध्रुव हेलिकॉप्टर तकनीकी खराबी आने के बाद नीचे गिरते समय बिजली के तार से नहीं टकराया था बल्कि इमरजेंसी फ्यूल नहीं निकल पाने से खेत में गिरने के बाद उसमें आग लग गई थी।
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तकनीकी खराबी और हेलिकॉप्टर नीचे गिरने में 10 -15 सेकेंड का समय लगा, जबकि फ्यूल निकलने की प्रक्रिया में कम से कम दो से तीन मिनट का समय लग जाता है। ऐसे में पायलट को संभलने का भी मौका नहीं मिल पाया था।
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गौरतलब है कि जब ध्रुव में तकनीकी खराबी आई थी तो वह जमीन से चार हजार फीट ऊंचाई पर उड़ रहा था।

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हेलिकॉप्टर दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही एयरफोर्स के इलाहाबाद मध्य कमान की टीम इस निष्कर्ष पर पहुंची है। पांच सदस्यीय इस टीम ने कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी में संबंधित अफसरों और जवानों के बयान दर्ज किए हैं।
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टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया और ब्लैक बॉक्स से घटना के बाबत तथ्य जुटाए। टीम में एयरफोर्स के बड़े अफसर और ध्रुव हेलिकॉप्टर बनाने वाली एचएएल कंपनी के अफसर भी शामिल थे।
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हालांकि अभी एयरफोर्स ने जांच का औपचारिक तौर पर खुलासा नहीं किया है लेकिन एयरफोर्स के एक अफसर ने बताया कि ध्रुव में मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी खामी होने की भी आशंका है। दुर्घटना स्थल से मिले ब्लैक बॉक्स में दुर्घटना से पहले की बातें रिकार्ड हैं और जांच में उसको खास तौर पर आधार बनाया गया है। ब्लैक बॉक्स जांच के लिए नेशनल एरोनॉटिकल लैब में बेंगलूरू भेजा गया था। जांच रिपोर्ट एयरफोर्स निदेशालय को भेजी गई है, जहां से उसे रक्षा मंत्रालय भेजा जाएगा।
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इस दुर्घटना में बरेली एयरफोर्स स्टेशन के सात जवानों की मौके पर ही मौत को गई थी। दुर्घटना के समय हेलिकॉप्टर ध्रुव यानी एएलएच मार्क-टू ने बरेली से मध्य कमान इलाहाबाद के लिए उड़ान भरी थी।
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एयरफोर्स के लिए यह दुर्घटना बड़ा झटका थी और बरेली एयरफोर्स स्टेशन अपनी स्थापना के 50 साल में पहली बार इस तरह के बड़े हादसे से रूबरू हुआ था। इसमें उसने 111 एयर विंग के सात जवान खो दिए।
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