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तस्वीरें: इंदिरा से स्मृति तक, बाबाओं की शरण में नेता

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मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति इरानी ने ज्योतिषी को हाथ दिखाकर विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्ष से लेकर सोशल मीडिया पर सवाल खड़ा किया जा रहा है कि वैज्ञानिकता को बढ़ावा देने के बजाय शिक्षा मंत्री अंधविश्वास में कैसे उलझ सकती हैं। हालांकि स्मृति इरानी ऐसी पहली मंत्री या राजनीतिज्ञ नहीं हैं, जो ज्योतिषियों या बाबाओं की शरण में गई हैं।
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पं नाथूलाल व्यास ने भविष्यवाणी की कि स्मृति एक दिन राष्ट्रपति बनेंगी। हालांकि विरोध होने पर स्मृति ने कहा कि ‘मैं व्यक्तिगत जीवन में क्या कर रही हूं, इससे आपकी टीआरपी बढ़ती है। आपको मुनाफा होता है तो ठीक है, लेकिन अगर मेरे राजनीतिक जीवन पर मेरे व्यक्तिगत काम का असर नहीं पड़ रहा तो मुझे नहीं लगता कि आप लोगों को ऐसा कुछ दिखाने से फायदा होगा।’

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बाबाओं की शरण में क्या भाजपा और क्या कांग्रेस, जिन्हें भी मौका मिला उन्होंने मत्‍था टेका। इंदिरा गांधी, पीवी नरसिंह राव और स्मृति इरानी फेहरिश्त में चंद नाम भर हैं।

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धीरेंद्र ब्रह्मचारी इंदिरा गांधी के योग गुरु थे। ब्रह‌्मचारी ने इंदिरा की अध्यात्मिक स्तर पर भी मदद की और राजनीतिक स्तर पर भी। माना जाता है कि आपात काल के दिनों में इंदिरा गांधी ने कई राजनीतिक निर्णय ब्रह्मचारी के  कहने पर लिए थे। ब्रह्मचारी ने योग का अध्ययन वाराणसी में किया था।
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पं जवाहर लाल नेहरू ने उन्हें इंदिरा गांधी को योग सिखाने के लिए नियुक्त किया। माना जाता है कि इंदिरा ब्रह्मचारी से काफी हद तक प्रभाव‌ित थीं। ब्रह्मचारी ने दूरदर्शन के जरिए योग का प्रचार भी किया। पुजारी की मौत 1994 में एक प्लेन क्रैश में हुई। चित्र में वह एक अंतरराष्ट्रीय योग कांफ्रेंस में दिख रहे हैं।
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चंद्रास्वामी की छवि विवादित तांत्रिक की रही। पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के साथ उनका जुड़ाव चर्चा में रहा था। माना जाता कि वे राव के धर्मगुरु थे। उन पर वित्तीय अन‌ियमितताओं के आरोप भी लगे। उन्हें 1996 में गिरफ्तार भी किया गया। तस्वीर में बाएं चंद्रा स्वामी है और सबसे दांऐ सुब्रह्मण्यम स्वामी, जो इन दिनों भाजपा में हैं।
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देवराहा बाबा की मृत्यु बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के दो वर्ष पहले हो गई थी। हालांकि लिब्रहान आयोग ने उन्हें भी आरोपियों की सूची में शामिल किया था। फिर भी देवराहा बाबा की छवि सेक्यूलर संत की बनी रही। राजनीति के कई दिग्गजों ने उनके दर पर मत्‍था टेका था।

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देवराहा बाबा के दर पर माथा टेकने वालों में इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और बूटा सिंह शामिल थे। देवराहा बाबा अपने पैरों से आशीर्वाद देते थे।

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तस्वीर में दाईं ओर दिख रहे कैलाशानंद ब्रह्मचारी दावा करते हैं कि वे मुलायम सिंह यादव के आध्यात्मिक धर्म गुरु है। बाईं ओर दिख रहे रामेदव के सामने नेता साष्टांग करते ही रहते हैं, ये किसी से छ‌िपा नहीं है।

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चारा घोटाले में सुप्रीम कोर्ट से राहते पाने के बाद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ‌मिर्जापुर में पगला बाबा के आश्रम गए थे। पगला बाबा एक तांत्रिक हैं।
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स्वरूपानंद को कांग्रेस महास‌चिव दिग्विजय सिंह अपना गुरु मानते हैं। स्वरूपानंद अपने बयानों के कारण अक्सर विवादों में रहते हैं।
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