वैसे तो पूरे देश में विजयादशमी (दशहरा) का त्योहार पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है लेकिन कर्नाटक में स्थित मैसूर में इस कुछ अलग ही अंदाज देखने को मिलता है। इस अवसर हाथी को करीब 750 किलो सोने के आभूषण पहनाकर यात्रा निकाली जाती है।
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दशहरा निकल गया लेकिन यादगार हैं ये तस्वीरें
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मैसूर के निवासी विजयादशमी का त्योहार बहुत धूम धाम से मनाते हैं।
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इस मौके पर पारम्परिक नृत्यों का भी आयोजन किया जाता है।
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इस त्योहार पर हाथी का खासकर के प्रयोग किया जाता है क्योंकि इसे संभ्रांतता का प्रतीक माना जाता है।
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ढोल नगाड़ों और बैंड बाजों के साथ एक विशाल रैली निकलती है जो मैसूर के राजा के महल तक जाती है।
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इस अवसर पर मैसूर के राजा पारम्परिक विधि विधान से अनुष्ठान का आयोजन करते हैं और गजराज का स्वागत करते हैं।
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पारम्परिक अनुष्ठान के दौरान आयुध पूजा भी होती है। रानी त्रिशिका देवी पारम्परिक अनुष्ठान को देखती हुई।
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मैसूर के राजा यदुवीर कृष्णदत्त चमराजा वाडियार अपनी प्रजा का अभिवादन स्वीकार करते हुए।