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पोस्टर देखकर आतंकी बना मुंबई का दुश्मन हेडली

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26/11 को मुंबई में हुए आतंकी हमलों में पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकी डेविड कोलमैन हेडली को भी आरोपी बनाया जाएगा। कोर्ट के फैसले को मुंबई पुलिस अहम कामयाबी मान रही है। मुंबई हमलों की जांच में डेविड हेडली क्यों एक अहम कड़ी है, जानिए विस्तार से।
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डेविड हेडली पाकिस्तानी मूल का अमेरिकी नागरिक है। फिलहाल वह अमेरिका की जेल में बंद है। 55 वर्षीय हेडली के पिता पाकिस्तानी थे, जबकि मां अमेरिकी। उसका असली नाम दाऊद गिलानी है।
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दाऊद गिलानी के शुरुआती दिन पाकिस्तान में बीते। माता-पिता के बीच अलगाव होने के बाद वह अमेरिका चला गया।

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अमेरिकी शहर न्यूयॉर्क में रहते हुए उसने एक वीडियो स्टोर चलाया, हालांकि युवावस्‍था में उसने पाकिस्तान के कई दौरे किए। और पाकिस्तान के उन्हीं दौरे के बाद वह आतंकियों के संपर्क में आया।
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पाकिस्तान में उसने एक बार लाहौर की कदिसिया मस्जिद का दौरा किया, उस दौरे ने हेडली की सोच में आमूलचूल बदलाव ला दिया। उस मस्जिद में हेडली ने लश्कर-ए-तैयबा का एक पोस्टर देखा, जिसमें भारत में जिहाद के लिए पैसे मांगे गए थे।
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हेडली ने 50,000 पाकिस्तानी रुपए दान किए थे। 1999 और 2000 में भी उसने पाकिस्तान के दौरे किए और मुंबई हमलों के मास्टर माइंड हफीज सईद से मुलाकात की। 2001 में हेडली ने लश्कर-ए-तैयबा में शामिल होने का फैसला किया।
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पाकिस्तान के अलग-अलग शिविरों में 2002 से 2005 के बीच उसने आतंकी प्रशिक्षण लिया। 2005 में लश्कर ने उसे पहली‌ जिम्मेदारी सौंपी थी। उसी समय उसने अपना नाम बदला और दाऊद गिलानी से डेविड कोलमैन हेउली बन गया। 14 सितंबर, 2006 को वह पहली बार भारत आया, जिस शहर में उसने डेरा डाला, वह मुंबई था।

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जब वह मुंबई आया, उसके पास एक कैमरा था, दो क्रेडिट कार्ड और 3,000 डॉलर। वह 14 दिसंबर, 2006 तक भारत में रहा, और उस दौरान उसने मुंबई नगर निगम की इमारत, हाजी अली की दरगाह, गेडवे ऑफ इंडिया और होटल ताज की तस्वीरें लीं और वीडियो बनाए।

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उसने अपोलो बंदर, राज्य पुलिस मुख्यालय, डीएन रोड और आजाद मैदान की तस्वीरें भी ली। हेडली ने वो तस्वीरें और वीडियो मेजर इकबाल को दिए, जो आईएसआई का हैंडलर था। वहां से ये चीजें साजिद माजिद उर्फ वासी के पास पहुंची, जो 26/11 के मुंबई हमलों का मुख्य षडयंत्रकर्ता था।

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हेडली ने बाद में अपनी पत्नी फाइजा के साथ भारत आया और होटल ताज और ट्राडेंट में रुका। उन होटलों की रेकी करने के बाद वह 15 मई, 2007 को वापस चला गया। 2008 में हेडली ने एक बार फिर भारत का दौरा किया था। उस समय उसने भाभा एटॉमिक रिसर्च इंस्टिट्यूट की रेकी भी की थी ओर कोलाब से नाव लेकर उन स्‍थानों की पहचान की थी, जिससे समुद्र के रास्ते मुंबई में घुसा जा सकता था।

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11 अप्रैल, 2008 को उसने बधवार पार्क के पास कफ परेड को मुंबई घुसने के लिए चिन्हित किया था।
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मार्च, 2009 में वह एक बार फिर मुंबई आया था। उस दौरे में उसने मुंबई स्थिति चबाड हाउस और दिल्ली, गोवा, पुष्कर और पुणे के कई स्‍थानों की रेकी की थी।
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