पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की आगामी किताब ‘एडवांटेज इंडिया : फ्रॉम चैलेंज टू अपॉर्च्यूनिटी’ में दावा किया गया है कि भारत पर अग्नि मिसाइल का परीक्षण टालने के लिए अमेरिका और नाटो का भारी दबाव था। 1989 में अग्नि मिसाइल के परीक्षण से कुछ ही घंटे पहले कलाम के पास तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कैबिनेट सचिव टीएन शेषन की हॉटलाइन कॉल आई थी।
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अमेरिका भी डर गया था 'अग्नि' से, क्या है इसमें ऐसा खास?
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शेषन ने कलाम को बताया कि अमेरिका और नाटो किसी भी मिसाइल का परीक्षण टालने के लिए दबाव बना रहे हैं। इस समय अग्नि की स्थिति क्या है? कलाम ने कुछ क्षणों तक सोचा और जवाब दिया कि अब परीक्षण टाला नहीं जा सकता है। बहुत देर हो गई है। खैर, शेषन ने हां कह दी और 22 मई 1989 को अग्नि का परीक्षण हुआ। आगे की तस्वीरों में देखें अग्नि मिसाइल और उसकी ताकत के बारे में।
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देश की रक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में सबसे पहले अग्नि 1 मिसाइल का सफल प्रयोग किया गया था।
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यह एक मिडियम रेंज बैलेस्टिक मिसाइल है। जिसकी मारक क्षमता 700 से 1250 किमी तक है। जिसकी जद में पाकिस्तान के कुछ हिस्से आते हैं।
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यह मिसाइल 1,000 किग्रा तक के परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।
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इस मिसाइल में ईंधन के तौर पर सिंगल स्टेज सॉलिड फ्यूल का इस्तेमाल किया जाता है।
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करीब 1200 किग्रा वजनी इस हथियार की सबसे पहली टेस्टिंग 1989 में उड़ीसा के चांदीपुर टेस्टिंग रेंज में की गई थी। इसे 2002 में भारतीय सेना में शामिल किया गया था।
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अग्नि 2 की गिनती उन भारतीय हथियारों में की जाती है जो अपने दुश्मन का नामोनिशान मिटाने में पूरी तरह सक्षम है।
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यह एक इंटमीडिएट रेंज बैलेस्टिक मिसाइल है जिसकी मारक क्षमता 2000 से 3000 किमी तक है।
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20 मीटर लंबा यह हथियार 1000 टन परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।
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इस मिसाइल में ईंधन के तौर पर टू-स्टेज सॉलिड फ्यूल का इस्तेमाल किया जाता है।
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करीब 1600 किग्रा वजनी यह मिसाइल 1999 से ही देश की सेवा में तत्पर है।
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भारतीय मिसाइल खेमे में अग्नि 3 को 2011 में शामिल किया गया था।
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यह एक इंटमीडिएट रेंज बैलेस्टिक मिसाइल है जिसकी मारक क्षमता 3,500 से 5,000 किमी तक है।
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इसकी लंबाई 17 मीटर लंबी और यह 2,500 किग्रा वजन तक हथियार ले जाने में सक्षम है।
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इस मिसाइल में ईंधन के तौर पर टू-स्टेज सॉलिड फ्यूल का इस्तेमाल किया जाता है।