विपक्षी दलों के साथ मिलकर संसद में भूमि अधिग्रहण विधेयक को अटकाने की कांग्रेस की कोशिश नाकाम होती दिख रही है। इस मसले पर विपक्षी दलों की फूट से सरकार को नई ऊर्जा मिली है। संसद के मानसून सत्र से पहले सोमवार को हुई सर्वदलीय बैठक में सपा और बसपा की ओर से मसले पर सकारात्मक संकेत मिलने के बाद सरकार ने भी नरम रुख अपनाने का संकेत दिया। सरकार की रणनीति है कि वह भूमि अधिग्रहण बिल के जरिये विपक्ष खासतौर से कांग्रेस को सियासत चमकाने का मौका नहीं देगी।
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ऐसे में वह एकराय कायम होने के बाद ही बिल पर आगे बढ़ेगी। इस बारे में सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि ज्यादा संशोधन की स्थिति में नया विधेयक भी लाया जा सकता है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि भूमि अधिग्रहण पर सरकार कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को सियासत चमकाने का अवसर नहीं देगी। अब जो भी फैसला होगा सर्वसम्मति के बाद ही होगा। बिल का फैसला राज्यों पर छोड़ने का दांव चल कर सरकार ने पहले ही अपने ऊपर बने दबाव को कम किया है। इस बीच लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने मामले पर बनी संयुक्त संसदीय समिति का कार्यकाल बढ़ाकर अगस्त का पहला हफ्ता कर दिया है।
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इस बीच लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने मामले पर बनी संयुक्त संसदीय समिति का कार्यकाल बढ़ाकर अगस्त का पहला हफ्ता कर दिया है। इससे भूमि अधिग्रहण बिल के मानसून सत्र में पारित होने के आसार बेहद कम हो गए हैं। ग्रामीण विकास मंत्री चौधरी वीरेंद्र सिंह ने कहा अधिक संशोधन आए तो सरकार नया बिल भी ला सकती है। बताया जा रहा है कि भूमि अधिग्रहण बिल पर जारी सियासी जंग के बीच सपा और बसपा के बदले रुख से सरकार को राहत मिली है।
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इन दोनों दलों ने संकेत दिया है कि सरकार अगर मौजूदा भूमि अधिग्रहण बिल में
कुछ बदलाव करे तो वे इसका समर्थन कर सकते हैं। बताया जाता है कि मानसून
सत्र के कामकाज को सुचारु रूप से चलाने की कवायद में हुई सर्वदलीय बैठक में
समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने कहा कि केंद्र सरकार को जमीन
बिल पर आगे बढ़ना चाहिए।
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पीएम नरेंद्र मोदी को भूमि अधिग्रहण बिल पर बीच का रास्ता निकालना चाहिए। वहीं बसपा ने भी बिल पर नरमी दिखाते हुए कहा है कि वह इस बिल को सशर्त समर्थन को तैयार है। हालांकि, बिल पर एकराय के जरिये आगे बढ़ने का संकेत पीएम मोदी बीते सप्ताह संपन्न हुई नीति आयोग की बैठक में ही दे चुके हैं। उन्होंने मुख्यमंत्रियों को आश्वस्त किया था कि वे उनके सुझावों के मद्देनजर ही बिल पर आगे बढे़गे।
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ऐसा करके पीएम ने एक तीर से दो निशाना साधा है। पहले उन्होंने केंद्र सरकार पर बिल को लेकर बने दबाव को कम किया, तो उन राज्यों को भी कठघरे में ला दिया है जो कि बैठक में बिल का समर्थन और बाहर विरोध करते हैं।भूमि अधिग्रहण बिल पर गठित संसद की संयुक्त समिति अब अगस्त के पहले हफ्ते तक रिपोर्ट देगी। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने समिति की समय बढ़ाने की मांग स्वीकार कर ली है।
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इससे स्पष्ट हो गया है कि सरकार इस मसले पर अब जल्दबाजी में नहीं है और वह सर्वसम्मति की दिशा में बढ़ने की रणनीति अपनाएगी। संसदीय समिति का समय बढ़ाए जाने से मानसून सत्र में विधेयक को पास करवाना अब मुश्किल दिख रहा है। वैसे इस बात के भी संकेत मिल रहे हैं कि समिति मानसून सत्र के दौरान रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करेगी। सरकार से और समय मांगा जाएगा ताकि विधेयक के लिए एक बार फिर अध्यादेश लाना जरूरी हो जाए।
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सरकार में बैठे लोगों के अनुसार, भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को बार-बार लाने में कुछ भी असामान्य नहीं है। कम से कम 15 अध्यादेश दो या अधिक बार लाए गए हैं।संसद के मानसून सत्र में व्यापम और ललित गेट पर संग्राम छिड़ना तय है। मंगलवार से सत्र शुरू होने से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में ही मंत्री और मुख्यमंत्रियों के इस्तीफे की मांग को सरकार ने सिरे से ठुकरा दिया तो कांग्रेस ने भी दो टूक कह दिया कि फिर सदन चलना मुश्किल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक में कहा कि संसद चलाना सबकी जिम्मेदारी है। वह हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री की इस पेशकश के बावजूद सर्वदलीय बैठक में गतिरोध खत्म नहीं हुआ।
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ललित गेट और व्यापम घोटाले के मुद्दे पर संसद नहीं चलने देने की कांग्रेस की चेतावनी से सपा, तृणमूल कांग्रेस और बसपा जैसे क्षेत्रीय दल पूरी तरह से सहमत नहीं है। संसदीय कार्यमंत्री की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में कई दल कांग्रेस के रुख से असहमत थे।
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इसके बाद स्पीकर सुमित्रा महाजन ने भी सभी दलों के नेताओं की बैठक की।भाजपा
ललित गेट और व्यापम को मुद्दा बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सियासी
दबाव बनाने की कांग्रेस की रणनीति को सफल नहीं होने देगी।
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पार्टी का मानना
है कि इन मुद्दों को हवा देकर कांग्रेस की रणनीति सीधे पीएम मोदी की छवि पर
चोट करने की है।इसलिए पार्टी कांग्रेस के आरोपों का बेहद आक्रामक तरीके से
विरोध करेगी। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ
मजबूत छवि ही मोदी की पहचान है।