2016 तक प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 16 और शहरों में 22 घंटे बिजली देने की प्रदेश सरकार की योजना को पलीता लग सकता है। यूपी सरकार ने बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के नेटवर्क को विकसित करने के लिए पॉवर सिस्टम डेवलपमेंट फंड से 2635 करोड़ रुपये की सहायता की मांगी थी, लेकिन केंद्र ने केवल 500 करोड़ देने की सहमति देकर प्रदेश सरकार को झुनझुना थमा दिया है।(सभी फोटो: जी पॉल, अमर उजाला, दिल्ली)
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मोदी के मंत्री से मिले अखिलेश, क्या है माजरा?
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दिल्ली में हुई मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व केंद्रीय बिजली मंत्री पीयूष गोयल की बहुप्रतीक्षित मुलाकात के बाद भी प्रदेश को उम्मीद के हिसाब से मदद नहीं मिल सकी। कई बार लटकने के बाद यह मुलाकात राज्यपाल राम नाईक के हस्तक्षेप के बाद हो सकी।
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इसके अलावा पावर प्लांट को कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार फरवरी माह तक प्रदेश सरकार को 30-40 करोड़ टन उत्पादन क्षमता वाले कोयला ब्लॉक का आवंटन करेगी।
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केंद्र सरकार व राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच चली लंबी बैठक के बाद यादव की मौजूदगी में गोयल ने बताया कि ग्रामीण इलाके में कृषि व घरों के फीडर को अलग-अलग करने के लिए दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत 75 फीसदी राशि केंद्र सरकार देगी। उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश में 854 वितरण सब स्टेशन लगाने पर भी चर्चा हुई।
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इस काम में भी केंद्र सरकार ने सहयोग देने का वादा किया है। बैठक में दादरी पावर प्लांट से उत्तर प्रदेश को और अधिक बिजली आवंटित करने पर भी विचार किया गया। ट्रांसमिशन प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और पावर ग्रिड मिलकर हर महीने वेस्टर्न कॉरिडोर के निर्माण कार्य की समीक्षा करेगी।
प्रदेश को क्या मिला? 1-झांसी और जालौन में 250-250 मेगावाट की दो सोलर परियोजनाओं की होगी स्थापना। 2-घाटमपुर थर्मल परियोजना को लेकर पर्यावरण और वन मंजूरी में आ रही दिक्कतों को जल्द सुलझाया जाएगा। 3-4000 मेगावाट बिजली आपूर्ति के लिए पावर पर्चेज एग्रीमेंट (पीपीए) होगा। इसमें प्रदेश सरकार के हित में नियमों में मिलेगी ढील।