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तस्वीरें: मारा गया इनामी डकैत बलखड़िया, पुलिस को मिले सबूत

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इस साल चित्रकूट पुलिस के साथ बलखड़िया की चार बार मुठभेड़ हो चुकी थी। तीन बार वह बचकर भाग निकला। आईजी जोन इलाहाबाद ब्रजभूषण शर्मा का दावा है कि दो जुलाई की आखिरी मुठभेड़ में वह पुलिस की गोली का शिकार हो गया। उस दिन चित्रकूट में एसओ मारकुंडी श्रवण कुमार सिंह ने मुखबिर से सूचना मिलते ही चार सिपाहियों के साथ किहुनिया गांव के पास बलखड़िया गिरोह से मुठभेड़ कर ली। डकैतों की गोली से सिपाही पुष्पेंद्र कुमार, कैलाश सिंह और मुखबिर घायल हो गया था।
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चार रोज पहले बलखड़िया के भतीजे पुष्पेंद्र ने भी उसके मरने का दावा किया था मगर पुलिस ने सुबूतों के बिना इस पर भरोसा नहीं किया था। मंगलवार को चित्रकूट की पुलिस को मुखबिर के जरिए चिता पर रखी बलखड़िया की लाश और जलाने की मोबाइल से खींची कई फोटो मिली। आईजी जोन का कहना है कि यह साफ हो गया है कि बलखड़िया मारा गया। पुलिस चिता से मिले अवशेष से डीएनए नमूना लेकर उसके भाई के डीएनए से मिलान कराएगी ताकि संदेह नहीं रह जाए।
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चित्रकूट में बहिलपुरवा इलाके के बरूई गांव के सुदेश पटेल उर्फ बलखड़िया उर्फ बलखंड का पिछले करीब 12 साल से चित्रकूट और मध्य प्रदेश के सतना जिले में आतंक था। उसके खिलाफ हत्या, कत्ल की कोशिश, अपहरण, डकैती, गैंगस्टर, पुलिस मुठभेड़ के चित्रकूट में 82 और सतना में 30 मुकदमे दर्ज हो चुके थे। उस पर यूपी शासन ने पांच लाख और मध्य प्रदेश सरकार ने एक लाख रुपये का ईनाम घोषित कर रखा था। मगर अपने गिरोह के एक दर्जन सदस्यों के साथ बलखड़िया जंगल में छिपकर लगातार वारदातें करते हुए पुलिस के लिए सिरदर्द बना रहा।

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पुलिस की गोली से ढेर हुआ बलखड़िया दरअसल कुछ साल पहले चित्रकूट में मारे गए दुर्दांत डाकू अम्बिका पटेल उर्फ ठोकिया का खास आदमी था। उसके मारे जाने के बाद बलखड़िया ने पुलिस को खुलकर चुनौती देनी शुरू कर दी। अक्तबूर 2004 में ठोकिया के साथ मिलकर बलखड़िया ने चित्रकूट के सीतापुर इलाके में दो सिपाहियों को गोली से उड़ा दिया था। उनकी दो राइफल और 100 कारतूस लूट लिए थे। जुलाई 2007 में ठोकिया और बलखड़िया के साथ चित्रकूट के बैड़ा जंगल में मुठभेड़ के दौरान एसटीएफ के सात जवान मारे गए थे। कई दरोगा और सिपाही जख्मी हुए थे। 2008 में सतना के मझगवां के बिछियन में बलखड़िया गिरोह ने 12 लोगों को घर में आग लगा जिंदा जला दिया था।
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यूपी और मध्य प्रदेश के जंगल में पिछले करीब एक दशक से सक्रिय कुख्यात डाकू सरगना सुदेश उर्फ बलखड़िया 13 रोज पहले चित्रकूट में पुलिस के साथ मुठभेड़ के दौरान मारा गया है। गिरोह के डकैतों ने बलखड़िया की लाश जला दी थी ताकि पुलिस को सुबूत नहीं मिल सके। आईजी जोन ने बुधवार को इलाहाबाद में मीडिया के सामने बलखड़िया के पुलिस मुठभेड़ में ढेर होने का दावा करते हुए चिता पर रखे उसके शव के फोटो जारी किए। आईजी जोन का कहना है कि छह लाख रुपये के इनामी दुर्दांत डाकू का मारा जाना पुलिस के लिए बड़ी कामयाबी है।
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