देश इस साल अपना 67वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस अवसर पर हम आपको गणतंत्र दिवस से जुड़े कुछ अनजाने तथ्य बताने जा रहे हैं।
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भारतीय गणतंत्र की 26 अनोखी बातें जानिए दुर्लभ तस्वीरों के साथ
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26 जनवरी का चुनाव खासकर इसलिए किया गया था क्योंकि 1930 में लाहौर में हुई बैठक में 26 जनवरी को 'पूर्ण स्वराज दिवस' के रूप में बनाने की घोषणा हुई थी। इसी वजह से इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।
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भारतीय संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है।
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भारतीय संविधान इतना बड़ा है कि इसके निर्माण में डॉ भीमराव अंबेडकर को 2 साल 11 महीने और 18 दिन का समय लगा।
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भारतीय संविधान को दो भाषाओं में लिखा गया। ये भाषाएं हिन्दी और अंग्रेजी है। मूल संविधान को पूरी तरह हाथ से लिखा गया है।
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फिलहाल संविधान के मूल पांडुलिपि को हीलियम से भरे बक्सों में संसद भवन में रखा गया है।
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भारतीय संविधान में कई देशों के संविधान का संगम है। इसमें स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे की अवधारणा फ्रांसीसी संविधान से ली गई। वहीं पंच वर्षीय योजना की अवधारणा रूस के संविधान से ली गई।
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संविधान से आदर्श वाक्य 'सत्यमेव जयते' को अथर्वेद के मुंदका उपनिषद से लिया गया है। आबिद अली ने 1911 में इसका हिन्दी में अनुवाद किया था। आदर्श वाक्य का चुनाव भारत रत्न महामना मदन मोहन मालवीय ने किया था।
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बहुत कम ही लोग जानते हैं कि भारतीय ध्वज का नमूना मछलीपट्नम के एक किसान ने तैयार किया था। उनका नाम पिन्गली वेंकैया था।
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गणतंत्र दिवस के मौके पर जब राष्ट्रपति तिरंगे झंडे को लहराते है उस दौरान 21 तोपों की सलामी दी जाती है।
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1950 में राष्ट्रपति को 31 बंदूकों की सलामी दी गई थी। यह सलामी 26 जनवरी 1950 को करीब 10:30 बजे दी गई थी।
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गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर हमेशा एक खास धुन बचाई जाती है जिसे 'अबिद विद मी' के नाम से जाना जाता है। यह महात्मा गांधी की पसंदीदा धुन थी।
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आपको यह जानकर भी हैरानी होगी कि 1955 से पहले गणतंत्र दिवस कार्यक्रम का आयोजन राजपथ पर नहीं होता था।
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भारतीय संविधान के लागू होने से पहले देश में ब्रिटिश कानून लागू था जो आजादी के बाद भी चलता रहा। इस कानून को 'भारत सरकार कानून 1935' के नाम से जाना जाता है।
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पहली बार गणतंत्र दिवस का आयोजन राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में किया गया था।
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देश के पहले राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद उस वक्त किसी बुलेटप्रूफ गाड़ी से नहीं बल्कि एक खुली बग्घी पर सवार होकर बाहर निकले थे।
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उनके साथ उनके सुरक्षा गार्ड घोड़ों पर सवार होकर उनके साथ चल रहे थे।
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पहले गणतंत्र दिवस के मौके पर इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति सुकर्णों बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने आए थे।
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राजपथ से पहले दिल्ली के सड़को पर ही मार्च निकला करता था जो दिल्ली के कनॉट प्लेस से होता हुआ जाता था।
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आज कल गणतंत्र दिवस के मौके पर केवल एक दिन का ही राष्ट्रीय अवकाश घोषित होता है लेकिन 26 जनवरी 1950 को दो दिनों के राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा की गई थी।
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राजपथ पर होने वाले रंगारंग कार्यक्रमों का संचालन पहले इरविन एम्फिथियेटर में हुआ करता था जहां करीब 15,000 लोग इकट्ठे होते थे।
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26 जनवरी 1950 के दिन ही राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में पहली बार चार सिरों वाले शेर और भगवान बुद्ध की प्रतिमा को स्थापित किया गया था।
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सारनाथ में स्थित अशोक के खंभे से भारतीय प्रतीक चिन्ह 'अशोक चक्र' का चुनाव किया गया।
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26 जनवरी 1950 को ही पहली बार राष्ट्रकवि रविंद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखित 'जन गण मन' को राष्ट्र गान की उपाधि दी गई। बांग्ला में लिखी इस कविता हिन्दी अनुवाद 1911 में आबिद अली ने ही किया था।
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1955 से राजपथ पर ऊंटों की परेड भी निकलती थी जिसमें राजस्थान से सेना के ऊंट हर साल चलकर आते थे और गणतंत्र दिवस में हिस्सा लेते थे लेकिन इस बार इसे परेड में शामिल नहीं करने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, अंतिम समय में इसे भी मंजूरी मिल गई।