साल 2014 के ख़त्म होने पर कुछ ऐसे चेहरों, घटनाओं, उपलब्धियों पर नज़र जो एशिया में साल भर चर्चाओं में रहे।
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साल की 15 खबरें जिन्होंने दिया कभी खुशी कभी गम
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दीपिका पादुकोण- टाइम्स से टकराने के लिए
बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार पर तब आगबबूला हो गईं जब अख़बार ने उनकी तस्वीरें इस हेडलाइन के साथ छापीं- "ओएमजीः दीपिका पादुकोण का क्लीवेज शो।" उन्होंने ट्वीट किया, "हां! मैं एक औरत हूं। मेरे स्तन हैं और क्लीवेज भी! आपको इससे कोई दिक्कत है!" दीपिका को इस मामले पर सोशल मीडिया और लोगों का भरपूर समर्थन मिला।
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जोकोवी- इंडोनेशिया का नया शासकजोको विडोडो ने जुलाई में इंडोनेशिया राष्ट्रपति चुनाव जीता. उन्हें जोकोवी के नाम से जाना जाता है। वह इंडोनेशिया में पहले
राष्ट्रपति बन गए हैं जो न तो सेना से हैं और न ही कुलीन राजनीतिक वर्ग से। भ्रष्टाचार से ग्रस्त देश में उनकी छवि ईमानदार नेता की है।
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अप्रैल में दक्षिण कोरिया में 476 लोगों को ले जा रही नौका दुर्घटनाग्रस्त हो गई जिसमें ज़्यादातर स्कूल के बच्चे थे। इनमें से 300 लोग मारे गए थे। दुर्घटना के लिए कई चीज़ें ज़िम्मेदार मानी गई थीं लेकिन इसके लिए गुस्सा मुख्यतः नौका के कप्तान ली जून-सिओक पर टूटा।
उन्होंने एक अप्रशिक्षित सदस्य को नौका चलाने दी, नाव खाली करने का आदेश नहीं दिया और सबसे बढ़कर वह सबसे पहले नाव छोड़ने वालों में से थे। उन्हें लापरवाही के आरोप में 36 साल जेल की सज़ा दी गई।
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किम यो-जोंग- बढ़ती शक्ति? उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन के सितंबर में अचानक दिखना बंद हो जाने से इन अंदेशों को बल मिला कि वह या तो बीमार हैं या फिर सत्ता पर नियंत्रण खो रहे हैं। लेकिन अक्टूबर में किम फिर दिखे, हालांकि वह छड़ी के सहारे चल रहे थे लेकिन सत्ता उन्हीं के हाथ में थी। उनकी छोटी बहन किम यो-जोंग को पहली बार सरकारी मीडिया में पार्टी की वरिष्ठ सदस्य बताया गया। क्या आने वाले समय में वह ज़्यादा प्रभावशाही होंगी?
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नरेंद्र मोदी मई में अर्थव्यस्था को पटरी पर लाने के वायदे के साथ भारत में लोकसभा चुनाव जीते। भारतीय जनता पार्टी के नेता को एक प्रभावशाली नेता के साथ ही कुछ लोग विभाजक के तौर पर देखते हैं- उनके जितने प्रशंसक हैं, उतने ही आलोचक।
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अशरफ़ ग़नी लंबी और विवादित चुनावी प्रक्रिया के बाद अशरफ़ ग़नी ने दुनिया की सबसे मुश्किल ज़िम्मेदारियों में से एक, अफ़गानिस्तान का राष्ट्रपति पद, संभाला। वह ऐसे समय में राष्ट्राध्यक्ष बने हैं जब ज़्यादातर अंतरराष्ट्रीय सेनाएं अफ़गानिस्तान छोड़ने की तैयारी कर रही हैं। उनकी महत्वाकांक्षी योजना गरीबी ख़त्म करने और भ्रष्टाचार समाप्त करने की है- लेकिन इसके लिए उन्हें शांति और सुरक्षा कायम करनी होगी।
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जैक मा- चीनी ईकॉमर्स का बादशाह ई-कॉमर्स की बड़ी कंपनी अलीबाबा के संस्थापक जैक मा का यह साल अच्छा रहा। सितंबर तक उनकी निजी जायदाद एक साल में ही दोगुनी होकर 19.5 अरब डॉलर (12.40 ख़रब रुपये से ज़्यादा) हो गई जब उनकी कंपनी के शेयर की रिकॉर्ड स्तर पर बिक्री हुई। अलीबाबा का मूल्य अब 231.4 अरब डॉलर (1472.97 ख़रब रुपये से ज़्यादा) हो गया है जो अमेज़न और फ़ेसबुक से कहीं ज़्यादा है।
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ज़ाउ यॉंगकैंग- कैद में 'बाघ' चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने जुलाई में के भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अभियान के तहत ऐलान किया था कि वह 'बाघ और तितली' किसी को नहीं छोड़ेंगे। इस पर अमल तब नज़र आया जब चीन के सबसे शक्तिशाली नेताओं में से एक पूर्व सुरक्षा प्रमुख ज़ाउ योंगकैंग पर भ्रष्टाचार की जांच शुरू की गई।
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हांगकांग के छात्र- विरोध प्रदर्शनकर्ता हालांकि हांगकांग के लोकतंत्र-समर्थक प्रदर्शनों के दौरान कई नेता नेतृत्व के लिए आगे आए लेकिन शुरुआत में आए छोटे समूह जो जमे रहे- उन्हीं ने इस आंदोलन को असाधारण बनाया। आंदोलन की शुरुआत में पुलिस की आंसू गैस और मिर्ची के स्प्रे से युवाओं को तितर-बितर करने की कोशिशों के बाद और लोग आंदोलन में जुटे।
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मार्च में एक के बाद एक न्यूज़ कांफ्रेंस में मलेशिया के कार्यवाहक परिवहन मंत्री हिशमुद्दीन हुसैन और नागरिक उड्डयन मंत्री अज़हरुद्दीन अब्दुल रहमान को लापता मलेशियाई एयरलाइन्स एमएच370 के यात्रियों के रिश्तेदारों और रिपोर्टरों का सामना करना पड़ा। गुस्साए लोगों ने उन पर आरोप लगाया कि स्थिति पर उनका ज़रा भी नियंत्रण नहीं है।
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फिल ह्यूज़- क्रिकेटर जिसकी मौत मैदान पर हुई नवंबर में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट जगत 25 साल के क्रिकेट खिलाड़ी फ़िल ह्यूज़ की मौत से हिल गया। ह्यूज़ की बाउंसर लगने से मौत हो गई थी।
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मलाला यूसुफ़ज़ई और कैलाश सत्यार्थी- नोबल विजेता अक्टूबर 2014 में बच्चों के हक़ की दो आवाज़ों ने नोबल पुरस्कार साझा किया- पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा के लिए संघर्ष करने वाली मलाला यूसुफ़ज़ई और बाल अधिकार आंदोलनकारी कैलाश सत्यार्थी। नोबल समिति ने कहा, "यह महत्वपूर्ण है कि एक हिंदू और एक मुसलमान शिक्षा और चरमपंथ के ख़िलाफ़ संघर्ष में साझा हैं।"
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भारतीय मंगल अभियान सितंबर में भारत का मंगलयान 300 दिन और 67 करोड़ किलोमीटर की यात्रा कर मंगल पर पहुंच गया। इसके साथ ही भारत मंगल पर अंतरिक्ष यान भेजने वाला चौथा देश बन गया। भारत पहली कोशिश में ही यह सफलता पाने वाला पहला देश है।
कोआला- कूटनीतिज्ञ नवंबर में दुनिया के 20 सबसे शक्तिशाली नेता ब्रिस्बेन में जी-20 बैठक में मिले। इसमें अर्थव्यवस्था पर ज़ोर था लेकिन अंततः कोआला आकर्षण का केंद्र बन गए। कई दिन तक रूख़ी वार्ता के बाद हर नेता ने इन प्यारे जानवरों को गले लगाया जिससे फिर मुस्कान और शुभकामनाएं चेहरों पर लौट आर्ईं। इस तरह दुनिया को 'कोआला कूटनीति' की नई परिभाषा मिली।