(स्रोत: स्टफटूब्लोयोरमाइंड, गेटी इमेजेज) इंसान पुराने जमाने से ही युद्ध के लिए अलग-अलग तरह के हथियारों का इस्तेमाल करता आया है। इन्हीं में से एक है जैविक हथियार जो हजारों इंसानों को सुला सकता है मौत की नींद।
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इन हथियारों से न तो इमारतें हिलती हैं न पत्ते, खत्म हो जाती हैं बस्तियां
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जैविक हथियारों का उपयोग बड़ी तादात में इंसानों, जानवरों और फसलों को प्रभावित करने के लिए किया जाता है। इसके जरिए जीवाणुओं और विषाणुओं को वातावरण में फैला दिया जाता है जिसके प्रभाव में आने से लोगों को गंभीर बीमारियां हो जाती हैं और कुछ ही दिनों में उनकी मौत भी।
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तो आइए जानते हैं दुनिया के ऐसे ही दश सबसे खतरनाक जैविक हथियारों के बारे में।
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10. स्मालपॉक्स- इस श्रेणी में सबसे नीचे की सूची पर स्मालपॉक्स को शामिल किया गया है जिसे भारत में 'छोटी माता' बीमारी के रूप में जाना जाता है। इस विषाणु का प्रयोग कमांडर सर जेफ्री एमहर्स्ट के आदेश पर ब्रिटिश सेना ने किया था और ओटावा के नेटिव अमेरिकियों को संक्रमित कंबल बांटे थे जिसके प्रभाव में आने के हजारों बीमार पड़ गए थे और कईयों की मौत हो गई थी।
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9. एन्थ्रैक्स- 2001 के अंतिम महीनों में अमेरिकी सीनेट कार्यालयों और कुछ मीडिया संस्थानों में सफेद पाउडर लगे कुछ खत भेजे गए। इन पत्रों में खतरनाक बैक्टिरिया 'बैकिलस एंथ्रासिस' का इस्तेमाल किया गया जिससे करीब 22 लोग प्रभावित हो गए और उनमें से 5 लोगों की मौत भी हो गई। इस बैक्टिरिया का भी जैविक हथियार के रूप में इस्तेमाल होता है।
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7. प्लेग- यह एक ऐसी बीमारी है जिसका काला इतिहास रहा है। इस बीमारी की चपेट में आने की वजह से गांव के गांव और शहर के शहर लाशों से पट जाते थे। यह एक व्यक्ति से दूसरे तक तेजी से फैलता है जिसकी वजह से यह दुनिया के खतरनाक बीमारियों में गिना जाता है। इस बीमारी के लिए जिम्मेदार विषाणुओं का इस्तेमाल जैविक हथियार के रूप में होता है।
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6. टुलारेमिया- यह दुनिया के सबसे खतरनाक जीवाणुयों में से एक है जिसका जैविक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इस जीवाणु से प्रभावित होने वाले व्यक्ति के जिंदा बचने के महज 5 फीसदी ही उम्मीद होती है। इस जीवाणु का सबसे पहला इस्तेमाल सोवियत रूस पर किया गया था जिससे करीब 10,000 लोग प्रभावित हुए ते। सोवियत के पूर्व जैविक हथियारों के शोधकर्ता केन एलिबेक ने इसकी पुष्टि की थी।
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5. बोटुलिनम टॉक्सिन- इस जीवाणु का इस्तेमाल किसी बंद खोल के जरिए दुश्मन देश के ऊपर गिराकर किया जाता है। बाहरी वातावरण में घुलने के बाद यह सांस के रास्ते आपके शरीर में घूस जाता है और फिर आपको अपने चपेट में ले लेता है। इस प्रभाव में आने के 24 से 72 भीतर ही इंसान की मौत हो जाती है।
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4. राइस ब्लास्ट- जैविक हथियारों से केवल इंसानों को ही निशाना नहीं बनाया जाता बल्कि उनकी फसलों को निशाना बनाया जाता है जिससे की पूरी की पूरी फसल बर्बाद हो जाती है और देश में अनाज की कमी हो जाती है। दुश्मनों तक अनाज की आपूर्ति रोकना सेना का पुराना पैंतरा है। ऐसे में अगर खेतों में लगी फसल ही बर्बाद हो जाए तो कोई देश कैसे मजबूती से खड़ा रह सकता है?
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3. रिंडरपेस्ट- इस बीमारी की वजह से पशुओं और जानवरों में प्लेग जैसी स्थिति पैदा हो जाती है और वे तेजी से मरने लगते हैं। इस बीमारी को आज दुनिया इसके जर्मन नाम रिंडरपेस्ट से जानती है। यह बीमारी मीजल वायरस के ही करीबी एक वायरस से फैलती है और बेहद घाटत होती है।
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2. निपाह वायरस- इस वायरस की 1999 में उस वक्त पहचान हुई थी जब मलेशिया के निपाह क्षेत्र में इससे 265 लोग प्रभावित हुई। इनमें से 105 लोगों की मौत हो गई थी। इसमें से 90 फीसदी वायरस सूअरों में पाया गया था। ऐसा माना जाता है कि किसी फल के अंदर इसके विषाणु मौजूद थे। इस वायरस का इस्तेमाल भी जैविक हथियार के रूप में किया जा सकता है।
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1. चिमेरी वायरस- अगर आप समझते हैं कि प्लेग, स्मालपॉक्स और एंथ्राक्स दुनिया के सबसे खतरनाक जैविक हथियार हो सकते हैं तो यह आपकी भूल है। इस वायरस का इस्तेमाल बेहद ही खतरनाक जैविक हथियार के रूप में किया जा सकता है जिससे प्रभावित इंसान का बचाना नामुमकिन सा ही है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह कई बीमारियों के लक्षण अपने में समाए हुए रहता है।