मिलिए रमन राजा मन्नन से। ये केरल के इड्डुकी ज़िले में स्थित कोवीमला गांव के 16वें राजा हैं।हालांकि भारत में राजसी राज्यों की मान्यता को साल 1971 में समाप्त कर दिया गया था। लेकिन भारत के कुछ क्षेत्रों में कुछ लोग आज भी अपने स्थानीय राजाओं को मानते आ रहे हैं। रमन राजा को साल 2012 में गांव के कबायली समुदाय 'मन्नन' का राजा बनाया गया था।
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मिलिए एक राजा से जो झोपड़ी में रहता है, देखें तस्वीरें
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कोवीमला गांव में करीब 15,000 कबायली ग्रामीण रहते हैं और राजा और उनके परिवार को दशकों से अपना रक्षक मानते आए हैं। रमन राजा मन्नन से पहले उनके चाचा आर्यान राजा मन्नन गांव के राजा थे. 28 दिसंबर 2011 को उनकी मौत के बाद रमन राजा को ये पद दिया गया। दिलचस्प ये है कि इस राजवंश में राजा की मौत के बाद उनके बेटे की बजाय उनके भतीजे को राजा का पद दिया जाता है।
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ये है राजा का घर जो कि गांव के हर दूसरे घर जैसा ही दिखता है। इस राजवंश के पास कोई महल नहीं है।इस घर में वे अपनी पत्नी और एक बेटी के अलावा अपनी ताई के साथ रहते हैं।
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घर के भीतर का नजारा देख ये यकीन ही नहीं होता कि ये किसी राजा का घर है। शेल्फ पर पूर्व राजा आर्यान राजा मन्नन की तस्वीर रखी है। इनकी पत्नी इसी घर में रहती हैं।
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घर में एक बहुत पुराना टीवी सेट है जो उनके लिए मनोरंजन का इकलौता साधन है।
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और ये है 'राजमहल' की रसोई जिसे देख कर लगता है कि राजा और उनका परिवार बेहद सादा जीवन जीते हैं।
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और ये है उनका पालतू कुत्ता जो हर वक्त एक मोटी चेन से बंधा रहता है क्योंकि वो 'बेहद खूंखार है'।
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ये हैं राजम्मा जो पूर्व राजा आर्यान राजा मन्नन की पत्नी हैं। दोपहर के समय जब हम इनके घर पहुंचे तो वे बर्तन मांज रही थीं। उनका कहना था कि अब वो ज़माना गया जब हम वाकई एक राजघराने की ज़िंदगी जीते थे।
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ये हैं राजा के चचेरे भाई गोबी राजा मन्नन. वे इस तस्वीर में अपने राजवंश की ताकत का प्रतीक 'चेंगोल' ले कर खड़े हैं। गोबी राजा मन्नन ने बताया कि पुराने ज़माने में उनके पूर्वज राजाओं की तरह वैभवशाली पोशाक पहनते थे. लेकिन भारत की आज़ादी के बाद उनका दबदबा थोड़ा कम हो गया।हालांकि आज भी गांव के लोग राजा को ही अपना कर्ता-धर्ता मानते हैं।
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गांव का बच्चा-बच्चा राजा को जानता है. उनसे पूछा जाए कि राजा का घर कहां
है तो फट से राजा के घर जाने वाली सड़क की ओर इशारा करते हैं।
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हालांकि गांव के बुज़ुर्गों की राय बंटी हुई है। कुछ लोगों को
लगता है कि वर्तमान राजा उनके हित के लिए उतना काम नहीं करते जितना कि
पूर्व राजा किया करते थे, तो वहीं कुछ का मानना है कि राजा के पढ़े-लिखे
होने से गांव की अगली पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है।