प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में न्यायपालिका को नसीहत दी है कि वो अवधारणाओं के आधार पर फैसले देने से बचे। उन्होंने फाइव स्टार एक्टिविस्टों से न्यायपालिका को आगाह किया। क्या पीएम के निशाने पर ये फाइव स्टार एक्टिविस्ट तो नहीं।
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पीएम के निशाने पर फाइव स्टार एक्टिविस्ट कहीं ये तो नहीं?
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प्रशांत भूषण: प्रशांत भूषण वो चेहरा है जिन्हें भ्रष्टाचार, विशेष रूप से न्यायपालिका के भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी मुहिम चलाने के लिए जाना जाता हैं। उन्होंने 2जी की पर्तें खोलकर सरकार को मुश्किल में डाल दिया था।
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पीएम के निशाने पर फाइव स्टार एक्टिविस्ट कहीं ये तो नहीं?
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शांति भूषण: मोरार जी देसाई सरकार में विधि मंत्री रहे शांति भूषण सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील रहे हैं और इन्होंने कई अहम केसों में पैरवी की।
पीएम के निशाने पर फाइव स्टार एक्टिविस्ट कहीं ये तो नहीं?
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अरूणा राय: भारतीय प्रशासनिक सेवा में काम करने वाली अरूणा राय एनएसी की पूर्व सदस्या और जानी मानी सामाजिक कार्यकर्ता हैं।
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पीएम के निशाने पर फाइव स्टार एक्टिविस्ट कहीं ये तो नहीं?
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तीस्ता सीतलवाड़: गुजरात दंगों को लेकर मोदी के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली तीस्ता सीतलवाड़ जानी मानी पत्रकार हैं। वो भारतीयों के आम अधिकारों के लिए काफी सालों से लड़ती आई हैं।
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अमिताभ ठाकुर: कवि और लेखक हृदय अमिताभ ठाकुर आईपीएस अधिकारी हैं। अपनी आरटीआई याचिकाओं के जरिए चर्चा में रहने वाले ठाकुर दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल पर किताब लिखने वाले हैं।
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नूतन ठाकुर: इंस्टिट्यूट फॉर रिसर्च एंड डॉक्यूमेंटेशन इन सोशल साइंस नामक संस्था की सचिव नूतन ठाकुर ने राबर्ट वाड्रा से जुड़े मसले पर अपनी आरटीआई को लेकर पीएमओ को भी कटघरे में खड़ा कर दिया था।