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यह साल इन सितारों की मौत पर फूटकर रोया बॉलीवुड

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साल 2015 बॉलीवुड के लिए ऐसे गहरे घाव दे गया, जो जल्द नहीं भरेंगे। कुछ ऐसी मौतें हुई, जिनपर विश्वास नहीं हो रहा था कि अब वो हमारे बीच नहीं हैं। पूरा बॉलीवुड उनकी मौत से निराश हो गया। किसी को उसके मोटापे ने मार डाला, तो कैंसर का दर्द झेलते-झेलते दम तोड़ दिया, तो वहीं किसी की लाश उसके कमरे में पड़ी मिली।
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इसमें सबसे पहला नाम है दक्षिण की स्टार और बॉलीवुड में भी काम कर चुकी अभिनेत्री आरती अग्रवाल का, जिनकी मौत से दो दिन पहले ही उनकी फिल्म रिलीज हुई थी। जानकारी के मुताबिक उन्होंने अपना मोटापा हटाने के लिए लिपोसक्शन सर्जरी कराई और अचानक बीते 6 जून को उनकी मौत हो गई। वह महज 31 साल की थीं। जानकारी के मुताबिक निर्माता-निर्देशक उन्हें अपनी फिल्म में लेने के लिए मोटापा घटाने की मांग कर रहे थे। बस यही उनके मौत की वजह बन गई।
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इसके बाद कैंसर का बेइंतिहा दर्द झेलने के बाद संगीतकार आदेश श्रीवास्तव की महज 51 साल की उम्र में बीते 5 सितंबर को मौत हो गई है। आदेश ने बॉलीवुड को कई सुपरहिट गाने दिए। लेकिन उनके दर्द वाले गानों की धुन दिल में उतर जाती है। ऐसा लगता है मानो उन्हें पहले ही उस दर्द का अहसास था। आदेश को 2000 में आई फिल्म 'रिफ्यूजी' में संगीत देने के लिए उन्हें आइफा अवॉर्ड मिला। इसके बाद 'रहना है तेरे दिल में (2001)' 'कभी खुशी कभी गम (2001)', 'बागबान (2003)' और 'राजनीति (2010) ' में उनका तैयार किया गया संगीत बेहद लोकप्रिय हुआ।

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तीसरी मौत कारण तो आजतक स्पष्ट नहीं पाया है, लेकिन इस मौत ने बॉलीवुड से एक हीरा छीन लिया। बीते 22 अक्टूबर 2015 की सुबह उनका शव उनके घर में बिस्तर पर पर पड़ा हुआ मिला। वे मुंबई के गोरेगांव इलाके में रहते थे। क्वीन फिल्म का 'लंदन ठुमकदा', रब्ब ने बना दी जोडी का 'डांस से चांस', पार्टनर का 'सोणी दे नखरे सोणे लगदे', सिंग इज किंग का 'जी करदा' जैसे कई हिट उनके नाम हैं। लाभ जंजुआ ने शुरुआत पंजाबी गानों से की थी और उनके गाने मुंडेआं तो बच के रहीं ने काफी धूम मचाई थी। बाद में उनका बॉलीवुड का रुख किया। वहां भी झंडे गाड़ दिए। लेकिन बीच में साथ छोड़ चले गए।
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अक्टूबर महीने में ही 9 तारीख को मशहूर संगीतकार और गायक रवींद्र जैन का आज निधन हो गया। उन्हें लकवा का जबर्दस्त आघात आया। कुछ दिनों तक अस्पताल में जिंदगी-मौत की लड़ाई लड़ने के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। वह 71 वर्ष  के थे। उन्होंने अपने करियर में जिन शानदार फिल्मों में संगीत दिया उनमें चोर मचाए शोर (1974), गीत गाता चल (1975), चितचोर (1976) और अंखियों के झरोखे से जैसी फिल्मों में शानदार संगीत दिया। रवींद्र जैन ने कई गानों को गाया भी। रवींद्र जैन ने कई गाने लिखे भी।
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इसी साल भारतीय महिलाओं की दिलों में बस चुकी टीवी की दुनिया की बा नहीं रहीं। 20 मई को भारत के सबसे मशहूर टेलीविजन धारावाहिक 'क्योंकि सांस भी कभी बहु थी' में 'बा' का किरदार निभाने वाली सुधा शिवपुरी का निधन हो गया है। हालांकि वह लंबे समय से बिमार चल रही थीं। लेकिन 78 वर्षीय सुधा की मौत पर कई महिलाओं ने अपने घर में किसी मौत होने जैसा दुख महसूस किया। महिलाओं को उनसे खास लगाव था। उन्होंने 'स्वामी' 'इंसाफ का तराजू', 'अलका', 'पिंजर', 'हमारी बहू', 'सावन को आने दो', 'द बर्निंग ट्रेन' जैसी फिल्मों में भी काम किया था।
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इसी साल बॉलीवुड जगत में एक और दुख भरी खबर आई, जब लोग स्वर कोकिला लता मंगेशकर का जन्मोत्सव मना रहे थे, तभी किसी ने बताया की उनकी छोटी बहन आशा भोंसले के बेटे हेमंत भोंसले का स्कॉटलैंड में निधन हो गया है। वह 65 साल के थे और लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। 28 सितंबर को हुई घटना गायिका आशा भोसले को अंदर तक तोड़ कर रख दिया। तीन साल पहले साल 2012 में आशा की बेटी वर्षा ने खुदकुशी कर ली थी।

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इसी साल ने "गांधी" (1982), "शतरंग के खिलाड़ी" (1977), "हिना" (1991) और "राम तेरी गंगा मैली" (1985) जैसी फिल्मों में अपने दमदार अभिनय का मुजायरा पेश करने वाले सईद जाफरी को हमसे छीन लिया। उन्होंने नायक और खलनायक दोनों ही तरह की भुमिकाएं कमाल के अभिनय किए। उनके राम तेरी गंगा मैली के डायलॉग "गंगा कभी कलकत्ता से बनारस की ओर नहीं बहती, वो बनारस से कलकत्ता ही आती है" को बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन डायलॉगों में से एक माना जाता है। बीते 14 नवंबर को उनकी मौत की खबर फेसबुक जरिए सामने आई।
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इसके अलावा इस साल बॉलीवुड जगत से अभिनेता अशरफ उल हक, मोहन भंडारी, राम मोहन, निर्माता जिम्मी नरूला, निर्माता डी रामनायडू, सीनमैटोग्राफर इ विसेंट, लेखन रंजन बोस, निर्देशक जतिन कुमार अग्रवाल का निधन हो गया।
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