शाहरुख खान आज भले ही बॉलीवुड में कामयाबी का दूसरा नाम हों। लेकिन एक वक्त में उन्हें फ्लॉप का जिम्मेदार भी माना गया।
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जब शाहरुख को कहा गया, ये हीरो जैसा ही नहीं लगता
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आज शाहरुख खान पचास साल के हो रहे हैं। उनके जन्मदिन पर हम आपको बता रहे हैं शाहरुख के करियर के उस दौर के बारे में जब फिल्म फ्लॉप होने की वजह शाहरुख के नैन-नख्श को माना गया।
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जब शाहरुख को कहा गया, ये हीरो जैसा ही नहीं लगता
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शाहरुख ने अपने करियर की शुरुआत दीवाना से की। जिसमें उनके साथ ऋषि कपूर और दिव्या भारती थे। लेकिन फिल्म से शाहरुख के लीड रोल में आने की हसरत अधूरी ही रही। जो पूरी हुई 'दिल आशना है' से।
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'दिल आशना है' को हेमा मालिनी ने बनाया। इसमें भी शाहरुख के साथ दिव्या भारती थी। लेकिन फिल्म नहीं चली। खास बात रही फिल्म को लेकर किए गए विश्लेषण।
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कई फिल्मी पंडितों ने 'दिल आशना है' के फ्लॉप होने की वजह बताई शाहरुख की मोटी नाक। कहा गया कि ये नया हीरो तो हीरो जैसा लगता ही नहीं है।
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लेकिन शाहरुख खान ने सबको गलत साबित कर दिया। 1993 में आई फिल्म बाजीगर और डर ने शाहरुख को कामयाब सितारा बना दिया। लेकिन इन फिल्मों से शाहरुख की छवि बनी एक नेगेटिव रोल करने वाले हीरो की।
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1995 में शाहरुख खान की सात फिल्में आई। लेकिन 'दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे' ने शाहरुख को रोमांस का बादशाह बना दिया।
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शाहरुख खान ने काजोल के साथ कई शानदार रोमांटिक फिल्में दी। उन्हें बादशाह और किंग खान जैसे नामों से भी जाना जाता है।
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शाहरुख खान फिल्मों के साथ-साथ अपने परिवार और बच्चों से लगाव के लिए भी जाने जाते हैं।
शाहरुख और दिलीप कुमार दो ही लोग ऐसे है, जिन्हें फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता को अवार्ड आठ बार जीता है। वहीं 2005 में भारत सरकार ने उन्हें भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया।