राजकपूर ने अभिनय के साथ फिल्मों के निर्माण और निर्देशन में भी खुब नाम कमाया। उन्होंने ‘आवारा’, ‘बूट पॉलिश’ और श्री 420 जैसी यादगार फिल्म दीं, वहीं 'तीसरी कसम' और 'मेरा नाम जोकर' जैसी फिल्मों के लिए हिंदी सिनेमा उन्हें सदा याद करेगा।
विज्ञापन
'शो मैन' राज कपूर की यादगार सात फिल्में
2 of 8
“आवारा” आज भी समाज को संदेश देती है कि यह जरूरी नहीं कि एक अपराधी का बेटा अपराधी ही हो। इस फिल्म में राजकपूर जज के बेटे होते हैं, उनका एक बदमाश अपहरण कर लेता है, इसके बाद कहानी अपराध की गलियों में मुड़ जाती है। इस फिल्म का गाना 'आवारा हूं’ काफी मशहूर हुआ।
विज्ञापन
'शो मैन' राज कपूर की यादगार सात फिल्में
3 of 8
फिल्म श्री 420 का मुख्य किरदार एक गरीब लेकिन शिक्षित अनाथ होता है। नर्गिस के साथ राज कपूर ने इसमें खुद को पूरी तरह चार्ली चैपलिन जैसा बनाया। बारिश में एक छाते के नीचे फिल्माया गीत 'प्यार हुआ इकरार हुआ' में नरगिस और राजकपूर को कभी नहीं भूलाया जा सकता।
'शो मैन' राज कपूर की यादगार सात फिल्में
4 of 8
फिल्म बूट पॉलिश के लिए राज कपूर को निर्माता के रूप में हमेशा याद किया जाएगा। फिल्म में दो भाईयों की कहानी को फिल्माया गया है जो बूट पॉलिश करते हैं। फिल्म में आजादी के बाद के हालात को दिखाया गया है। बतौर अभिनेता वर्ष 1947 में प्रदर्शित फिल्म 'नीलकमल' उनकी पहली फिल्म थी।
विज्ञापन
'शो मैन' राज कपूर की यादगार सात फिल्में
5 of 8
फिल्म संगम राज कपूर की सबसे रोमांटिक फिल्मों में एक है। फिल्म में राजकपूर के साथ वैजयंती माला और राजेन्द्र कुमार थे। फिल्म की कहानी तीन दोस्तों और उनके बीच लव ट्राइएंगल पर आधारित है।
विज्ञापन
'शो मैन' राज कपूर की यादगार सात फिल्में
6 of 8
फिल्म मेरा नाम जोकर असल में एक ऐसे इंसान की कहानी है जो दुनिया के गम को लेकर बदले में मुस्कूराहट देता है। माना जाता है, फिल्म में राज कपूर ने अपनी जिंदगी की असल घटनाओं को फिल्माया है। उनका असल जिंदगी में नाम 'रणबीर राज कपूर' था। वैसे इस फिल्म की असफलता से राजकपूर को गहरा सदमा पहुंचा।
विज्ञापन
'शो मैन' राज कपूर की यादगार सात फिल्में
7 of 8
शैलेन्द्र ने राज कपूर और वहीदा रहमान को लेकर ‘तीसरी कसम’ फिल्म बनाई। फिल्म इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई, फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया। फिल्म आज भी अपनी वैचारिक पृष्ठभूमि के लिए याद की जाती है।
राज कपूर के कैरियर में उनकी जोड़ी अभिनेत्री नरगिस के साथ काफी पसंद की गई। दोनों की जोड़ी सबसे पहले वर्ष 1948 में प्रदर्शित फिल्म 'बरसात' में ही नजर आई। फिर तो एक सिलसिला सा बन गया। उन्होंने 1935 में प्रदर्शित फिल्म 'इंकलाब' से पर्दे पर पदार्पण किया था।