परिणीति चोपड़ा उन हीरोइनों में से एक मानी जाती हैं जो खुल कर अपने दिल की बात सबके सामने रखती हैं। फिर चाहे किसी को ठीक लगे या नहीं।
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परिणीति ने बयां किया दर्द, 'पीरियड्स में क्या-क्या सहना पड़ा'
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एक ऐसा विषय जिस पर लड़कियां आमतौर पर खुल कर बात भी नहीं करना चाहती उसे परिणीति जोरदार तरीके से उठाती हैं।
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परिणीति ने बयां किया दर्द, 'पीरियड्स में क्या-क्या सहना पड़ा'
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वो विषय कोई और नहीं बल्कि लड़कियों को हर महीने होने वाले पीरियड्स यानी मासिक धर्म है। परिणीति इस विषय को लेकर इतनी संजीदा है कि एक बार एक पत्रकार को फटकार भी लगा चुकी हैं जब उसे इस प्रक्रिया को 'परेशानी' कर डाला था।
परिणीति ने बयां किया दर्द, 'पीरियड्स में क्या-क्या सहना पड़ा'
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एक बार फिर परिणीति ने इस विषय पर बात करने के लिए मंच खोला है जहां एक सैनिटरी पैड के प्रोडक्ट लॉन्च पर उन्होंने खुल कर सवालों के जवाब दिए। आगे जानिए उन्होंने क्या-क्या कहा।
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परिणीति ने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि वे एक छोटे शहर की रहने वाली हैं जहां पीरियड्स को लेकर पुरानी तर्कहीन मानसिकताएं हैं। ये जरूरी है कि इन्हें मिटाया जाए।
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परिणीति कहती हैं कि इनमें से कुछ मानसिकताएं का तो अर्थ समझ आता है लेकिन कई ऐसी हैं जिनका कोई मतलब नहीं। जैसे कि अचार को न छूना। उन्होंने बताया कि उनकी दादी भी उन्हें ऐसे वक्त पर अचार से दूर रहने को कहती थीं।
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ये भी मानसिकताएं चली आ रही हैं कि ऐसे में मंदिर में नहीं जाना चाहिए। किचन में नहीं घुसना चाहिए या बाल नहीं धुलने चाहिए।
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परिणीति ने कहा,''मुझे हमेशा लगता था कि मैंने कुछ गलत नहीं किया इसलिए मुझे ये सब करने से मत रोको। हम आज विकासशील देश में रहते हैं और बहुत आगे आ गए हैं लेकिन इन सब में हम आज भी बहुत पीछे हैं। ये सब अब नहीं हो सकता। ये 2016 है, यह बेवकूफी है कि हम आज भी ये बातें करते हैं।''
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उनका यह भी मानना था कि ये सारी बातें हमारे देश में ही होती हैं, विदेश में नहीं। हमें इन बेवकूफी भरी मान्यताओं से आगे आना होगा। इनकी कोई जरूरत नहीं है।
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वो कहती हैं,''हम बाकी सारे मुद्दों पर बात करते हैं कि हमें कैसा महसूस होता है। लेकिन इस पर बात करने से कतराते हैं या इन्हें मिटाने का जज्बा नहीं रखते। अब वक्त आ गया है कि हम ऐसा करें।''