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छोटे परदे पर फ्लॉप हुआ 'सुहागरात का फॉर्मूला' लेकिन क्यों?

Fri, 26 Jun 2015 01:39 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला
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बॉलीवुड की फिल्मों में कई उत्तेजक सीन देखने को मिल जाते हैं। हीरो और हीरोइन के बीच सेक्स संबंधों को बखूबी दिखाया भी जाता है औऱ लोग पसंद भी करते हैं। लेकिन बात जब छोटे पर्दे के धारावाहिकों की हो, तो दर्शकों की राय बदल जाती है।
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छोटे परदे पर फ्लॉप हुआ 'सुहागरात का फॉर्मूला' लेक‌िन क्यों?

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छोटे पर्दे पर अब ऐसे दृश्यों का चलन बढ़ गया है जिसमें शो के हीरो हीरोइन को नजदीक आते दिखाया जाता हो। लेकिन वहीं दर्शकों का रवैया टीवी के मामले में अलग हो जाता है जब शादी के रिश्ता को पूरा करने वाले संबंधों को शो में दिखाया जाता है।
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छोटे परदे पर फ्लॉप हुआ 'सुहागरात का फॉर्मूला' लेक‌िन क्यों?

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टीवी के धारावाहिकों में शादी के बाद के सेक्स सीन को एक बड़े जश्न की तरह माना जाता है। मानो एक बहुत बड़ा पड़ाव पार कर लिया हो। इसीलिए शो के लीड कपल करीब अपने रिश्ते को उस मुकाम तक पहुंचाने में एक साल तक का इंतेजार करते हैं।

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लेकिन कई सीरियलों के निर्देशक बताते हैं कि जिस भी दिन वे सीरियल में ऐसा सीन दिखाने वाले होते हैं, उस दिन की टीआरपी में गिरावट देखी जाती है। यानी कि दर्शक अपने टीवी सेट पर ऐसे सीन देखने से कतराते हैं।
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सीरियल दिया और बाती हम के निर्माता का मानना है कि दर्शक इन हीरो हीरोइनों को एक पवित्र जोड़े के रूप में देखते हैं इसलिए जब वे ऑनस्क्रीन ऐसे करीब आते हैं तो दर्शक असहज महसूस करने लगते हैं।
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बालिका वधु की कहानी लेखक कहती हैं कि अधिकतर परिवारों में टीवी सेट ड्राइंग रूम में लगे होते हैं और पूरा परिवार मिल के शो देखता है। ऐसे में जब अंतरंग दृश्य आते हैं तो महिलाएं चैनल बदल देती हैं या बच्चों को बहाने से अंदर भेज देती हैं।
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रंगरसिया के निर्माता कहते हैं कि जब तक शो में हीरो हीरोइन के बीच गलतफहमियां दिखाई जाती हैं, तब तक तो सीरियल की रेटिंग ऊपर रहती है। लेकिन जैसे ही उनके बीच शारीरिक संबंध बनने लगते हैं, लोग उसे देखना कम कर देते हैं।

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लोगों को सीरियल में हीरो हीरोइन का पास आना तो अच्छा लगता है। जब हीरो हीरोइन का दुपट्टा खींचता है या उसकी आंखों में आंखे डाल कर रोमांटिक डॉयलॉग बोलता है तो वे देखते हैं लेकिन जब वे शारीरिक संबंध बनाने की ओर बढ़ते हैं तो लोग शर्म के मारे नहीं देखते।

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निर्देशक बताते हैं कि लोगों को प्राइम टाइम में इस तरह के सीन नहीं देखते और टीआरपी 20-30% तक घट जाती है। लेकिन वहीं जब रात में 11-11:30 बजे सीरियल का रिपीट एपिसोड आता है, तब उसकी रेटिंग प्राइम टाइम से ज्यादा होती है।

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सीरियल बड़े अच्छे लगते हैं में जब ऐसा हुआ तो लोगों के गले से यह बात नहीं उतरी कि अधेड़ उम्र के जोड़े के बीच इस तरह कैसे शारीरिक संबंध दिखाया जा रहा है। उनकी ऑनस्क्रीन किस ने भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं लेकिन सीरियल की रेटिंग गिरी थी।

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लोगों को यह सब दृश्य फिल्मों में इसलिए बुरे नहीं लगते क्योंकि वहां यह मामूली बात हो गई है। सिनेमा हॉल में बैठ कर आपको पता नहीं चलता कि आगे कौन सा सीन आने वाला है। चाहे आप असहज महसूस भी करें तो भी उठ के जा नहीं सकते, न ही चैनल बदल सकते हैं।
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लेकिन धारावाहिकों में विज्ञापन से पहले या कई दिन पहले से ही प्रोमो में यह दिखा दिया जाता है कि आने वाले एपिसोड में ऐसी सीन दिखाया जाएगा। लोगों को सास बहु के झगड़े, आग लगाऊ पड़ोसन के नए नए प्लैन जानने में ज्यादा मजा आता है।
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