हिंदी सिनेमा को 100 से ज्यादा साल हो चुके हैं। फिल्मों में जितनी कहानी बदली है उतना ही उसे दर्शाने का तरीका भी। हालांकि ज्यादातर फिल्में प्यार पर ही आधारित होती हैं लेकिन प्यार को भी अलग अलग तरीके से बयां किया गया है। प्यार में जान लेना और देना दोनों इनका हिस्सा रहे हैं। ये हैं बॉलीवुड के वो दस सबसे चर्चित दौर जिन्होंने प्यार को नए पैमानों पर बखूबी दर्शाया।
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फिल्मों में रोमांस के 10 दौर, रची मोहब्ब्त की नई परिभाषा
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हिंदी फिल्मों में यह दौर बहुत चर्चित रहा और पसंद भी किया गया जब हीरो या हीरोइन में से कोई एक अमीर और दूसरा गरीब होता था। जीवन स्तर अलग अलग होने के बावजूद इनके बीच प्यार होता था। ये ट्रेंड आज कल कल भी कुछ फिल्मों में देखा गया। इस दौर की सबसे चर्चित फिल्मों में से ही हैं मुगल-ए-आजम, राम और श्याम, बॉबी, मैंने प्यार किया, इश्क, रमैया वस्तावैया।
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उसी तरह फिल्मों का सबसे चर्चित ट्रेंड ये भी रहा कि एक हीरोइन से दो हीरो को या एक हीरो से दो हीरोइनों को प्यार हुआ यानी कि लव ट्राइएंगल। अंत में जा कर एक ने अपने प्यार की कुर्बानी दी। ये दौर तो आज भी देखा जाता है। सिलसिला, दिल तो पागल है, कुछ कुछ होता है, स्टूडेंट ऑफ द ईयर, संगम, साजन, रहना है तेरे दिल में जैसी कई फिल्में इसमें शामिल हैं।
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एक दौर ये भी है कि हीरो या हीरोइन का पहले से ही कहीं रिश्ता तय होता है लेकिन फिर भी उसे दूसरे से प्यार हो ही जाता है। ऐसे में अमूमन हीरोइन का ही रिश्ता तय होता है लेकिन हीरो से मिलते ही वो उससे प्यार कर बैठती है। जैसे कि दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, हंप्टी शर्मा की दुल्हनिया, वीर-जारा, मेरे यार की शादी है, कुछ कुछ होता है।
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इस श्रेणी की भी कई फिल्मों हैं जिनमें आखिर में हीरो या हीरोइन या दोनो ही प्यार के नाम पर मर जाते हैं। अपनी जान देकर ही वे अपना प्यार अमर कर जाते हैं। इसमें सबसे चर्चित फिल्में हैं लैला-मजनू, हीर रांझा। इसके अलावा हाल ही में रिलीज हुई बाजीराव मस्तानी, उससे पहले गोलियो की रास लीला रामलीला, इशकजादे, दिल से, कयामत से कयामत तक में भी यही अंत होता है।
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कुछ फिल्में ऐसी भी हैं जिनमें हीरो-हीरोइन बचपन में दोस्त होते हैं, एक दूसरे को पसंद करते हैं लेकिन किसी वजह से बिछड़ जाते हैं। बड़े होकर वे फिर मिलते हैं और दोनों में प्यार हो जाता है। इस दौर की फिल्में थी साहब बीवी और गुलाम जिसमें वहीदा रहमान और गुरू दत्त की बचपन में शादी हो जाती है लेकिन बिछड़ जाते हैं। बड़े होकर फिर मिलते हैं। इसके अलावा कभी खुशी कभी गम में करीना-ऋतिक, आने वाली फिल्म फितूर में आदित्य-कैटरीना, मुक्कदर का सिकंदर में अमिताभ-राखी।
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कुछ फिल्मों में एक अनोखी लवस्टोरी भी देखी गई जहां हीरो या हीरोइन अपने से बड़े उम्र के इंसान से प्यार कर बैठते हैं। जैसे कि निशब्द में जिया खान-अमिताभ, चीनी कम में तबू-अमिताभ, जॉगर्स पार्क में-परिजाद-विक्टर बैनर्जी, एक छोटी सी लव स्टोरी में मनीषा कोइराला-आदित्य सील, दिल चाहता है में अक्षय खन्ना-डिंपल कपाड़िया और माया मेमसाब में शाहरुख-दीपा शाही।
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कुछ ऐसी भी फिल्में रही हैं जिसमें हीरो या हीरोइन को किसी अपराधी से प्यार हो जाता है। कुछ फिल्म में बाद में खुलासा होता है कि वह अपराधी है तो किसी में पहले से पता होने के बावजूद भी प्यार होता है। जैसे कि संघर्ष में प्रीति जिंटा को अक्षय कुमार से, दिल से में शाहरुख को मनीषा से, कुर्बान में करीना को सैफ से, हाईवे में आलिया को रणदीप से और किडनैप में मिनिषा को इमरान खान से।
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पहले जन्म में प्यार अधूरा रह गया तो हीरो या हीरोइन या दोनों ने दोबारा जन्म भी लिया। ये भी एक ट्रेंड रहा है। ऐसी लवस्टोरी के उदाहरण हैं फिल्म ओम शांति ओम जिसमें शाहरुख का पुनर्जन्म होता है, एक पहेली लीला में सनी लियोनी का, डेंजरस इश्क में करिश्मा कपूर तीन जन्म लेती हैं, लव स्टोरी 2050 में पुनर्जन्म न सही लेकिन भविष्य में जाकर प्रियंका और हरमन प्यार करते हैं।
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अपने प्यार के लिए भी हीरो-हीरोइनों ने दुश्मनों से बदला लिया है। ये भी प्रेम कहानियों का एक दौर रहा है। इसमें फिल्म नागिन शामिल है जिसमें रीना रॉय अपने नाग जितेंद्र की मौत का बदला लेती है। ऐसे ही बदलापुर में वरुण धवन यामी की मौत का बदला लेता है, कहानी में विद्या बालन अपने पति के लिए और गजनी में आमिर असिन के लिए दुश्मनों को मार डालते हैं।
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प्यार का एक रूप पागलपन भी रहा है। इस दौर की फिल्मों में हीरो या हीरोइन ने अपने प्यार को पाने के लिए किसी का कत्ल या कत्ल करने की कोशिश की है या हद पार की है। जैसे कि गुप्त में काजोल, डर में शाहरुख, अंजाम और पुकार में माधुरी, दस्तक में सुष्मिता सेन को पाने के लिए शरद कपूर का पागलपन, कुछ तो है में अनीता हसननदानी, प्यार तूने क्या किया, अग्नीसाक्षी।