फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक अनोखी जेल जहां कैदी खुद ही कर लेते हैं न्याय

Mon, 26 Oct 2015 01:47 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
विज्ञापन
1 of 7
सजा के भुगतान के लिए अदालतें कैदियों को जेल में डालती हैं लेकिन एक ऐसा अनोखा जेल भी है जहां कैदी खुद ही न्याय कर लेते हैं।

विज्ञापन

एक अनोखी जेल जहां कैदी खुद ही कर लेते हैं न्याय

2 of 7
दक्षिण अमेरिका की सबसे गरीब जगहों में एक बोलिविया की पहाड़ियों पर सैन पैडरो जेल दुनिया का इकलौता ऐसा जेल है जहां कैदियों के परिवार वाले जेल में ही कैदियों के साथ रहते हैं। यहां की सरकार ने शायद तंग आर्थिक हालातों के मद्देजर ऐसी जेल बनाई है।
विज्ञापन

एक अनोखी जेल जहां कैदी खुद ही कर लेते हैं न्याय

3 of 7
इस जेल में कैदी बाहरी सुरक्षा गार्डों से स्वतंत्र रहते हैं। कैदी खुद ही न्याय कर लेते हैं। इस अजीब जेल में करीब तीन हजार कैदी रहते हैं। इस बेहद सस्ते जेल के मॉडल को चलाने के लिए सरकारी मदद के अलावा कैदी भी अनुदान करते हैं। बाहरी लोगों के लिए ये जेल खतरनाक साबित हो सकता है।

एक अनोखी जेल जहां कैदी खुद ही कर लेते हैं न्याय

4 of 7
यौन अपराधियों के लिए इस जेल में जरा भी रियायत नहीं होती है। यौन अपराधियों को एक कंक्रीट के बने कुंए में डालकर उन्हें तब तक पीटा और बिजली के झटकों से यातनाएं दी जाती हैं जब तक उनके प्राण नहीं निकल जाते। इस दौरान पूरी भीड़ इकट्ठा होकर तमाशा देखती है।
विज्ञापन

एक अनोखी जेल जहां कैदी खुद ही कर लेते हैं न्याय

5 of 7
इस जेल में कैदी देश की सबसे प्योर कोकीन का निर्माण करते हैं और जेल के अंदर ही उसका धंधा भी करते हैं। खास बात ये भी है कि कोकीन के धंधे में बच्चे भी लगाए जाते हैं। यही नहीं, अदर गश्त करने का कोई कानून नहीं होने के वजह से सुरक्षा गार्ड रिश्वत लेकर ड्रग्स आदि बेचने में संलिप्त पाए जाते हैं।
विज्ञापन

एक अनोखी जेल जहां कैदी खुद ही कर लेते हैं न्याय

6 of 7
जेल में कैदियों को अपने रहने-खाने का खर्च खुद ही भी उठाना पड़ता है। या फिर कैदी खाना बनाने, कपड़े धोने, साफ-सफाई करने के काम में लग सकते हैं। लेकिन कैदियों की वास्तविक कमाई नशीले पदार्थों से ही होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

एक अनोखी जेल जहां कैदी खुद ही कर लेते हैं न्याय

7 of 7
ये जेल तब सुर्खियों में आया जब ऑस्ट्रेलियन लेखक रस्टी यंग ने इसके बारे में एक किताब लिखी।

सोर्स-डेलीमेल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें