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तस्वीरें: इस बार बेहद रोचक होगी केदारनाथ धाम की यात्रा, हिमखंडों को देख रोमांचित हुए तीर्थयात्री

Thu, 09 May 2019 04:25 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, केदारनाथ
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केदारनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला
भगवान आशुतोष के ग्याहरवें ज्योर्तिलिंग केदारनाथ धाम की पैदल यात्रा इस बार श्रद्धालुओं के लिए रोचक और नए अनुभवों को संजोने वाली साबित हो रही है। देश के विभिन्न प्रांतों से पहुंच रहे शिव भक्तों, विशेषकर युवा पीढ़ी विशालकाय हिमखंड व बर्फ की मोटी चादर देखकर गदगद हो रहे हैं। 
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केदारनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला
वे, हिमखंडों के किनारे सेल्फी खींचकर इसे यादगार बना रहे हैं। बाबा के भक्तों को लिनचोली से केदारनाथ तक लगभग 4 किमी बर्फ को काटकर बनाये गए रास्ते से होकर धाम पहुंचना पड़ रहा है। केदारनाथ मंदिर परिसर में काफी बड़े हिस्से से बर्फ की सफाई कर दी गई है। यहां मंदिर की भव्यता सबको आकर्षित कर रही है। 
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केदारनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला
गुरुवार को ब्राह्मवेला में प्रात: 5 बजकर 35 मिनट पर भगवान केदारनाथ के कपाट भक्तों के दर्शनार्थ खुल जाएंगे। इससे पहले दर्शन के लिए पहुंच रहे तीर्थयात्रियों को रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड पैदल मार्ग पर छोटी लिनचोली के बाद बर्फ के दर्शन हो रहे हैं। 

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केदारनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला
कुछ जगहों पर बर्फ की ऊंची-ऊंची दीवारों के बीच से श्रद्धालु धाम पहुंच रहे हैं। यह दृश्य देखकर मैदान प्रांतों से पहुंच रहे श्रद्धालु खुश हो रहे हैं। दिल्ली के रमेश शर्मा, निकिता, सुदेश, राजस्थान के अंशराम ने बताया कि वे पहली बार केदारनाथ यात्रा पर आ रहे हैं। 
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केदारनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला
यहां बर्फ को देखकर नया अनुभव मिला है। आज तक, टेलीविजन में भी बर्फबारी के दृश्यों को देखा था। लेकिन यहां विशालयकाय हिमखंड नजर आ रहे हैं। छानी कैंप से रुद्रा प्वाइंट के बीच तीन स्थानों पर श्रद्धालु 12 फीट ऊंची बर्फ की दो तरफा दीवारों के बीच से आगे बढ़ रहे हैं। 
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केदारनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला
यह हिस्सा पूरे पैदल मार्ग का सबसे रोमांचक है। जून 2013 की आपदा के बाद यह पहला मौका है, जब केदारनाथ यात्रा में मई माह के दूसरे सप्ताह में भी पैदल मार्ग व धाम में कई फीट बर्फ मौजूद है।
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केदारनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला
केदारनाथ पुनर्निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के पूर्व प्राचार्य कर्नल (सेवानिवृत्त) अजय कोठियाल ने बताया कि बीते पांच वर्षो में शीतकाल में पैदल मार्ग लिनचोली से रुद्रा प्वाइंट के बीच हमेशा ही संवेदनशील रहा है।
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