बिहार के नवनियुक्त मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शुक्रवार को पटना के एतिहासिक गांधी मैदान पर पांचवी बार सीएम पद की शपथ लेंगे। लाखों की क्षमता वाला यह गांधी मैदान अपनी राजनीतिक पहचान के कारण इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
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पटना के गांधी मैदान की ये खास बातें नहीं जानते होंगे आप
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गांधी मैदान का महत्व जानने के लिए हमें इतिहास के कुछ पन्ने पलटने होंगे। पटना के हृदय में बसे गांधी मैदान को अंग्रेजी राज में पटना लॉन के नाम से भी जाना जाता था।
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देश की मशहूर राजनीतिक शख्सियतों सुभाष चंद्र बोस, मोहम्मद अली जिन्ना, जयप्रकाश नारायण और नरेन्द्र मोदी में क्या समानता है? इस प्रश्न के उत्तर में बहुत से लोग अपना सिर खुजलाने लगेंगे। लेकिन इस सवाल का जवाब भी इसी गांधी मैदान में छुपा है।
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इन शख्सियतों के बीच सबसे बड़ी समानता यही है कि अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने और पूरे देश में बदलाव का संदेश देने के लिए इन्होंने पटना के इसी गांधी मैदान को चुना।
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कांग्रेस के भ्रष्टाचार और तानाशाही के खिलाफ लोकनायक जयप्रकाश ने संपूर्ण क्रांति की शुरूआत गांधी मैदान से की थी। जब उनकी एक आवाज पर यहां जुटी पांच लाख से ज्यादा लोगों की भीड़ ने पूरे देश में कांग्रेस के खिलाफ बिगुल बजने का संदेश दे दिया था। पटना के इसी गांधी मैदान में हुई जेपी की वह रैली इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज हो गई।
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आजादी से पहले बांकीपोर मैदान नाम से पहचाने जाने वाले गांधी मैदान में 1938 में मोहम्मद अली जिन्ना ने कांग्रेस के खिलाफ मुस्लिम लीग की एक एतिहासिक रैली को संबोधित किया था।
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इसके बाद सुभाष चंद्र बोस ने 1939 में नव गठित फारवर्ड ब्लाक की पहली रैली
को पटना के इसी ऐतिहासिक मैदान पर संबोधित किया था। आजादी से पूर्व
राष्ट्रपति महात्मा गांधी भी पटना प्रवास के दौरान कई बार शाम की सभाएं इसी
मैदान में करते थे। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी कई बड़ी राजनैतिक रैलियों को यहां संबोधित कर चुकी हैं।
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वहीं, पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आड़वाणी की ऐतिहासिक रथ यात्रा का गवाह पटना का यह गांधी मैदान बना था। इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद, जवाहर लाल नेहरू, जेबी कृपलानी, ईएमएस नंबूदरीपाद, राम मनोहर लोहिया, अटल बिहारी वाजपेयी सहित विभिन्न नेता भी यहां कई बड़ी रैलियों को संबोधित कर चुके हैं। हाल फिलहाल गांधी मैदान की एक पहचान ये भी है कि यहां देश की सबसे बड़ी गांधी प्रतिमा लगी हुई है।
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प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित होने के बाद नरेन्द्र मोदी ने भी पटना के गांधी मैदान से ही परिवर्तन रैली के जरिए देशभर में अपने चुनाव प्रचार का शुभारंभ किया था। उनकी इस रैली में पांच लाख से ज्यादा लोगों की भीड़ जुटी थी, जिसका संदेश पूरे देश में मोदी लहर के तौर पर गया।
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अभी समाप्त हुए विधानसभा चुनावों में प्रधानमंत्री मोदी ने गांधी मैदान में हुंकार रैली के जरिए बिहार चुनावों के लिए प्रचार अभियान का शुभारंभ किया था। इसमें भी लाखों लोगों की भीड़ जुटी थी।
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उनकी रैली के तुरंत बाद राजद, जेडीयू और कांग्रेस ने भी महागठबंधन की स्वाभिमान रैली कर मोदी को जवाब देने का प्रयास किया था। इस दौरान भी गांधी मैदान पर काफी भीड़ जुटी।
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राजनीतिक रैलियों के अलावा गांधी मैदान अपने रामलीला आयोजन के लिए भी प्रसिद्ध है। जहां हर साल रावण दहन के दौरान लाखों लोगों की भीड़ जुटती है। हालांकि इस दौरान कई हादसों के कारण भी यह मैदान काफी चर्चाओं में रहा है।